नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले के आरोपित अरुण पिल्लई को पत्नी की देखरेख के लिए मिली अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरुण पिल्लई को 24 जनवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि अंतरिम जमानत आपात स्थिति में अल्प अवधि के लिए दी जाती है। अंतरिम जमानत को बढ़ाई नहीं जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि अरुण पिल्लई को इस आधार पर अंतरिम जमानत आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। अरुण पिल्लई ने अपनी पत्नी के इलाज के लिए मिली अंतरिम जमानत को बढ़ाने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि अरुण पिल्लई की पत्नी को पीआरपी स्टेरॉयड प्रोसिजर से गुजरना है। इसके लिए पत्नी को छह हफ्ते की देखभाल की जरूरत होगी।
सुनवाई के दौरान ईडी ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि पिल्लई की पत्नी की देखभाल के लिए किसी स्थायी अटेंडेंट की जरूरत नहीं है, उन्हें केवल पीआरपी इंजेक्शन दिया जाना है। कोर्ट ने कहा कि पिल्लई 18 दिसंबर, 2023 से अंतरिम जमानत पर है, इसलिए अब अंतरिम जमानत आगे नहीं बढ़ाई जा सकती है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 18 दिसंबर, 2023 को अरुण पिल्लई को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी। उसके बाद हाई कोर्ट ने 4 जनवरी को पिल्लई की अंतरिम जमानत बढ़ाई थी। ईडी ने इस मामले में दाखिल पूरक चार्जशीट में अरुण रामचंद्र पिल्लई और अमनदीप ढल को आरोपित बनाया है। चार्जशीट में कहा गया है कि पिल्लई ने जांच के दौरान झूठा बयान दिया। अरुण पिल्लई ने साक्ष्यों को नष्ट करने में अहम भूमिका निभाई। दो साल में उसने पांच मोबाइल फोन नष्ट किए।
ईडी के मुताबिक जांच के दौरान अरुण पिल्लई घोटाले के दौरान इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन पेश नहीं कर सका। उसके पास मिले फोन में लोगों से बातचीत का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे साफ है कि अरुण पिल्लई ने साक्ष्यों को नष्ट करने में अहम भूमिका निभाई। ईडी के मामले में अरुण पिल्लई को 6 मार्च, 2023 को, जबकि अमनदीप ढल को 01 मार्च, 2023 को गिरफ्तार किया गया था। पिल्लई पर आरोप है कि उसने दूसरे आरोपित समीर महेंद्रू से रिश्वत की रकम इकट्ठा कर दूसरे आरोपितों को दी।