-लिसारी गेट पुलिस के फर्जी मुठभेड़ का मामला
प्रयागराज, 09 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यह स्थापित विधि सिद्धांत है कि पुलिस रिपोर्ट पर संतुष्ट न होने पर कोर्ट को पुनर्विवेचना का आदेश जारी करने का अधिकार है। प्रोटेस्ट पर यदि बयान व साक्ष्य से अपराध का खुलासा होता है तो वह धारा 190(1)बी के तहत कम्प्लेंट केस कायम कर अभियुक्त को सम्मन जारी कर सकता है।
प्रश्नगत मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता की प्रोटेस्ट अर्जी पर संज्ञान लेकर फर्जी मुठभेड़ के आरोप में याची पुलिस कर्मियों को सम्मन जारी किया गया था। जिसे कोर्ट ने विधि विरूद्ध करार देते हुए रद्द कर दिया है और सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद को नियमानुसार नये सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने मेरठ, लिसारी गेट थाना इंचार्ज श्याम पाल सिंह व अन्य पुलिस कर्मियों की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
उल्लेखनीय है कि 9 दिसम्बर 2002 को लिसारी गेट थाना पुलिस को मिली सूचना पर रेड डाली गई। फायरिंग के जवाब में पुलिस ने भी बचाव में गोली चलाई। इस मुठभेड़ में कम्मन घायल हुआ और एक भाग गया। बाद में कम्मन की मौत हो गई। उसके भाई अब्दुल करीम ने याचिका दायर कर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की। जिस पर सीबीआई ने मुठभेड़ असली मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट दी। इस पर सीबीआई कोर्ट से मुठभेड़ में शामिल पुलिस कर्मियों को सम्मन जारी किया गया था। जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी।