नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण के कानून को 2024 के लोकसभा चुनाव में ही लागू करने की मांग करने वाली एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमन की याचिका को ऐसी ही मांग करने वाली दूसरी याचिकाओं के साथ टैग कर दिया।
नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमन की याचिका में मांग की गई है कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण वाले कानून में परिसीमन करने के प्रावधान को हटाया जाए और इसी साल लोकसभा के होने वाले आम चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान लागू किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को पहले से दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया था। कोर्ट ने 12 दिसंबर 2023 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। मध्यप्रदेश कांग्रेस की नेता जया ठाकुर इसके पहले याचिका दायर कर चुकी हैं। याचिका में 2024 लोकसभा चुनाव से पहले आरक्षण लागू करने के आदेश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को परिसीमन के बाद लागू करने के प्रावधान को हटाया जाए और इस कानून को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू कर अपनी सच्ची भावना में लागू किया जाना चाहिए।
संसद ने 2023 में महिला आरक्षण को लेकर कानून पारित किया था। इस कानून में परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने का प्रावधान किया गया है। परिसीमन करने के बाद आरक्षण लागू होने पर ये 2024 के बाद लागू होगा। जया ठाकुर ने इसी प्रावधान को चुनौती दी है।