नई दिल्ली, 19 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के लिए निलंबित किए भाजपा विधायकों की याचिका पर 20 फरवरी को सुनवाई करेगा। आज इन विधायकों की ओर से वकील जयंत मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ये पहले ही कह चुका है कि आप अनिश्चित काल तक किसी को निलंबित नहीं रख सकते हैं।
सुनवाई के दौरान जयंत मेहता ने कहा कि पहली घटना पर किसी विधायक को तीन दिनों की अधिकतम सजा दी जा सकती है और दूसरी बार सात दिनों की अधिकतम सजा दी जा सकती है। इस मामले में इन विधायकों की ये पहले सजा है, ऐसे में उन्हें तीन दिन से ज्यादा की सजा नहीं दी जा सकती है। उसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतरिम राहत के मामले पर दलीलें सुनने के लिए 20 फरवरी की तिथि नियत कर दी।
आज सुबह इन विधायकों की ओर से वकील जयंत मेहता ने कार्यकारी चीफ जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने उठाया गया। उन्होंने कहा कि इन सातों विधायकों को गलत तरीके से विधानसभा से निलंबित किया गया है। ऐसा करना असंवैधानिक और विधानसभा के नियमों के विपरीत है, जिसके बाद कोर्ट ने आज ही सुनवाई करने का आदेश दिया।
दरअसल, 15 फरवरी को दिल्ली विधानसभा में उप-राज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण के दौरान कथित तौर पर बाधा डालने के आरोप में सात भाजपा विधायकों को निलंबित कर दिया गया। आप विधायक दिलीप पांडेय ने विधानसभा में सातों विधायकों के निलंबन का प्रस्ताव रखा, जिसे पारित कर दिया गया। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल ने विधायकों की ओर से बाधा डालने के मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया। निलंबित किये गए सात विधायकों में मोहन सिंह बिष्ट, अजय महावर, ओपी शर्मा, अभय वर्मा, अनिल वाजपेयी, जीतेंद्र महाजन और विजेंद्र गुप्ता हैं।