सुलतानपुर,06 फरवरी (हि.स.)। ”राम चरित मानस विश्व काव्य है। तुलसीदास की यह कृति समाज के मंथन का नवनीत है । समाज की रचना और मनुष्य की प्रतिष्ठा को स्थापित करना तुलसीदास की कविता का लक्ष्य है ।उनकी कविता मानवाधिकार,न्याय , समानता और जनतंत्र की स्थापना करती है।” यह बातें मुम्बई विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामजी तिवारी ने कहीं।
नगर के राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संगोष्ठी कक्ष में बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के अंतर्गत हिन्दी विभाग द्वारा ”तुलसीदास और उनकी कविता” विषय पर आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित किया ।
उन्होंने कहा कि तुलसीदास को पूर्णता में समझना हो तो उनकी सभी कृतियों को पढ़ना समझना होगा । तुलसीदास जैसे अवधी लिखते हैं वैसे ही ब्रज भी लिखते हैं। कृष्ण गीतावली में उन्होंने कृष्ण का वर्णन वैसे ही किया है जैसे राम चरित मानस में राम का । तुलसीदास की व्यक्तिगत भक्ति का सबसे बड़ा नमूना और प्रमाण विनय पत्रिका है ।
संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि, स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ. इन्द्रमणि कुमार व आभार ज्ञापन प्राचार्य प्रो.दिनेश कुमार त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.एम.पी.सिंह , डॉ.ओंकारनाथ द्विवेदी, पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर एम पी सिंह,उप प्राचार्य प्रो. निशा सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रंजना पटेल, डॉ.विभा सिंह व डॉ.ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह सिंह समेत महाविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।