नई दिल्ली, 22 फरवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछा है कि वो ये स्पष्ट रूप से बताए कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाईट कॉपर प्लांट ने किन-किन कानूनों का उल्लंघन किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बिना वजह बताए किसी उद्योग को बंद करने से निवेश प्रभावित होता है।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि राज्य सरकार ने कॉपर प्लांट को बंद नहीं किया है बल्कि पर्यावरण के खतरे को देखते हुए सहमति नहीं दी है। तब कोर्ट ने कहा कि आपको ये स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कॉपर प्लांट ने किन-किन पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया है। आप केवल सीधे तौर पर ये नहीं कह सकते कि प्लांट ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया है।
21 फरवरी को कोर्ट ने कहा था कि वो इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा। कोर्ट ने कहा था कि स्टरलाईट प्लांट को बंद करके बहुत कुछ हासिल नहीं किया जा सकता है लेकिन हमें लोगों के स्वास्थ्य और उनके हित को ध्यान में रखना होगा। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय लोगों बेजुबान हैं और वे सभी कोर्ट में नहीं आ सकते हैं। सुनवाई के दौरान स्टरलाईट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा था कि कोर्ट विशेषज्ञों की कमेटी का गठन कर सकती है। उन्होंने कहा था कि कमेटी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में गठित की जाए और वो अपनी रिपोर्ट एक महीने के अंदर दे दे।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा था कि कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि प्लांट से प्रदूषण हुआ है। इसी वजह से राज्य सरकार ने फैसला किया है कि इस प्लांट को शुरू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा था कि कोई भी कमेटी मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ कुछ नहीं कर सकती। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि कमेटी कंपनी के समक्ष शर्तें रखेगी और उन शर्तों का अनुपालन कराना होगा।
स्टरलाईट कॉपर प्लांट अप्रैल 2018 से बंद है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी, 2019 को वेदांता को निर्देश दिया था कि वे किसी भी राहत के लिए हाई कोर्ट जाएं। मद्रास हाई कोर्ट ने पिछले 18 अगस्त, 2020 को अपने फैसले में वेदांता को स्टरलाईट प्लांट को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी थी । मद्रास हाई कोर्ट के इसी फैसले को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।