संविधान से ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्दों को हटाने की मांग पर 29 अप्रैल को सुनवाई

नई दिल्ली, 09 फरवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने 1976 में देश के संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्दों को हटाने की मांग पर सुनवाई टाल दी है। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने 29 अप्रैल को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया।

यह याचिका भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि प्रस्तावना में संशोधन नहीं किया जा सकता है लेकिन सवाल ये है कि क्या तारीख को बरकरार रखते हुए प्रस्तावना में संशोधन किया जा सकता है। जस्टिस दत्ता ने वकीलों से अकादमिक दृष्टिकोण से इस पर विचार करने को कहा।

याचिका में 42वें संविधान संशोधन के जरिए धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्दों को जोड़ने की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि 42वें संविधान संशोधन के जरिए इन शब्दों को जोड़ना गैरकानूनी है। संविधान बनाने वालों ने कभी भी संविधान में समाजवादी या धर्मनिरपेक्ष विचार को लाना नहीं चाहा। यहां तक कि डॉ. बीआर अंबेडकर ने भी इन शब्दों को जोड़ने से इनकार कर दिया।