नई दिल्ली, 21 मई (हि.स.)। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने शराब घोटाले के प्रमुख अभियुक्त मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज किये जाने का स्वागत किया है। सचदेवा ने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मनीष सिसोदिया ने शराब व्यापारियों के मुनाफे में सात प्रतिशत की बड़ी वृद्धि की है। फोन नष्ट किए हैं और जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं अतः उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि अपने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इशारे पर सिसोदिया ने शराब घोटाला किया है और अब जब उसके परिणाम सामने आ रहे तो केजरीवाल एवं सिसोदिया दोनों कानून से भाग रहे हैं। सचदेवा ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा आज दूसरी बार जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद केजरीवाल एवं सिसोदिया को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
हिन्दुस्थान समाचार/विजयलक्ष्मी/आकाश
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इलेक्टोरल बॉन्ड देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला : प्रशांत भूषण
Kangra : Prashant bhushan : electoral bond
धर्मशाला, 21 मई (हि.स.)। इलेक्टोरल बॉन्ड मामला देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मंगलवार को धर्मशाला में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कही। प्रशांत भूषण ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए वह हर राज्य में जा रहे हैं व लोगों को इस मामले के बारे में जानकारी दे रहे है।
उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए पार्टियों को फंड देकर कंपनियों द्वारा ठेके लिए गए व पालिसी बदली गई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला तो दे दिया है लेकिन फिर से इस मामले में एसआईटी बनाकर इस मामले की जांच करवाने के लिए आदेश देने को कोर्ट को आग्रह किया गया है ताकि इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर हुए षड्यंत्र में किस-किस की संलिप्ता है का पता लगाया जा सके।
प्रशांत ने कहा कि एसआईटी जांच के बाद कंपनियों द्वारा पार्टियों को दिए गए पैसे को फिर से वापस करने के लिए भी निर्देश देने के लिए कोर्ट से आग्रह किया गया है। वहीं दिल्ली के सी.एम. अरविंद केजरीवाल पर पूछे गए प्रश्न के जबाव में प्रशांत ने कहा कि अन्ना आंदोलन उन सब ने मिलकर चलाया था, लेकिन जैसे ही अरविंद केजरीवाल ने पार्टी बना ली तो पार्टी के बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मजूबत हो गए।
उन्होंने कहा कि अन्ना मूवमेंट अच्छा लोकपाल बनाने के लिए छेड़ी गई मुहिम थी, लेकिन बाद में केजरीवाल के पार्टी बनाने के बाद मोदी को मजबूती मिली।