हरिद्वार, 15 मई (हि.स.)। ज्वालापुर स्थित सत्संग भवन में संत निरंकारी अनुयायियों की ओर से समर्पण दिवस पर विशाल सत्संग का आयोजन किया गया।
इस दौरान माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि जब हम हर पल इस निरंकार प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पित भाव से अपना जीवन जीते चलें जाते हैं। तब वास्तविक रूप में मानवता के कल्याण के लिए हमारा जीवन समर्पित हो जाता है। ऐसा ही प्रेमा-भक्ति से युक्त जीवन बाबा हरदेव सिंह ने हमें स्वयं जीकर दिखाया।
मानवता के मसीहा बाबा हरदेव सिंह जी की सीख का जिक्र करते हुए माता सुदीक्षा ने कहा कि बाबा ने स्वयं प्यार की सजीव मूरत बनकर निस्वार्थ भाव से हमें जीवन जीने की कला सिखाई। जब परमात्मा से हमें सच्चा प्रेम हो जाता है तब इस मायावी संसार के लाभ और हानि हम पर प्रभाव नहीं डाल पाते, क्योंकि तब ईश्वर का प्रेम और रजा ही सर्वोपरि बन जाते हैं।
इसके विपरीत जब हम स्वयं को परमात्मा से न जोड़कर केवल इन भौतिक वस्तुओं से जोड़ लेते हैं तब क्षणभंगुर सुख-सुविधाओं के प्रति ही हमारा ध्यान केन्द्रित रहता है। जिस कारण हम इसके मोह में फंसकर वास्तविक आनंद की अनुभूति से प्रायः वंचित रह जाते हैं। वास्तविकता तो यही है कि सच्चा आनंद केवल इस प्रभु परमात्मा से जुड़कर उसकी निरंतर स्तुति करने में हैं, जो संतों के जीवन से निरंतर प्रेरणा लेकर प्राप्त किया जा सकता है। यही भक्त के जीवन का मूल सार भी है। परिवार, समाज और संसार में स्वयं प्यार बनकर प्रेमरूपी पुलों का निर्माण करें क्योंकि समर्पण एवं प्रेम यह दो अनमोल शब्द ही संपूर्ण प्रेमा भक्ति का आधार है जिसमें सर्वत्र के कल्याण की सुंदर भावना निहित है।
समर्पण दिवस के अवसर पर दिवगंत संत अवनीत की निस्वार्थ सेवा का जिक्र करते हुए सतगुरु माता ने कहा कि उन्होंने सदैव गुरु का सेवक बनकर अपनी सच्ची भक्ति एवं निष्ठा निभाई है। इस समागम में मिशन के अनेक वक्ताओं ने बाबा के प्रेम, करुणा, दया और समर्पण जैसे दिव्य गुणों को गीत, भजन और कविताओं के माध्यम से व्यक्त किये।