क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम राज्य नहीं, इसके खिलाफ रिट याचिका हाईकोर्ट में दाखिल नहीं हो सकती : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 20 जून (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के खिलाफ रिट याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है। क्योंकि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य के अंतर्गत नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि आश्रम के कार्यों को विनियमित करने वाला या इसके मामलों को नियंत्रित करने के लिए राज्य को सशक्त बनाने वाला कोई कानून नहीं है।

यह आदेश जस्टिस जे जे मुनीर ने प्रेम चंद्र की याचिका पर पारित किया है। कोर्ट ने यह आदेश पारित करते समय सुरेश राम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और राम बचन सिंह बनाम मुख्य कार्यकारी अधिकारी खादी ग्रामोद्योग एवं अन्य के निर्णयों पर भरोसा किया। जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि श्री गांधी आश्रम, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के अंतर्गत राज्य नहीं है और आश्रम के खिलाफ कोई रिट स्वीकार्य नहीं है।

याची क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, गढ़ रोड, मेरठ में पर्यवेक्षक था और उसके बाद उसे श्री गांधी आश्रम, खादी भंडार, बड़ौत, जिला बागपत में स्थानांतरित कर दिया गया था। याची ने यूनियन बैंक और केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, जहां क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, मेरठ के खाते रखे जाते हैं। जिसमें आश्रम की ओर से धन के दुरुपयोग और आशियाना प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में गलत बिक्री विलेख निष्पादित करने के बारे में शिकायत दर्ज कराई गई है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जब जांच की गई तो क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के सचिव ने उसे अपनी शिकायत वापस लेने की धमकी दी और आश्रम के बैंक खाते फ्रीज कर दिए। इसके बाद याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। याची ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के आधार पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। विपक्षी वकील ने याचिका की पोषणीयता के बारे में प्रारम्भिक आपत्ति उठाई।

यह तर्क दिया गया कि क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसायटी होने के नाते, राज्य की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता। तर्क दिया गया कि आश्रम किसी भी सार्वजनिक कार्य का निर्वहन नहीं करता है। रिट याचिका की स्वीकार्यता का बचाव करते हुए याची ने उत्तर प्रदेश खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि आश्रम ने इस कानून के तहत सार्वजनिक कर्तव्यों का पालन किया है।

न्यायमूर्ति मुनीर ने कहा कि लखनऊ में श्री गांधी आश्रम द्वारा नियंत्रित क्षेत्रीय गांधी आश्रम, मेरठ अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ नहीं था। क्योंकि राज्य का इसके कामकाज पर कोई वैधानिक नियंत्रण नहीं था। इसके अलावा, 1965 के अधिनियम के तहत एक पंजीकृत सोसायटी होने के नाते, इसके कामकाज को निर्देशित करने वाला कोई क़ानून नहीं था।