ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 21 लाख की ठगी, हरियाणा से दबोचे गए तीन अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग
देहरादून, 30 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड एसटीएफ (साइबर क्राइम पुलिस) ने कई करोड़ के चीनी निवेश घोटाले का भंडाफोड़ किया है। देहरादून के सरस्वती विहार निवासी एक महिला के साथ 21 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में एसटीएफ ने देशभर में ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के सरगना सहित तीन सदस्यों को गुड़गांव (हरियाणा) से गिरफ्तार किया है। ये सभी दुबई में बैठे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के संपर्क में रहकर उनके इशारे पर भारत में ठगी करते हैं और दुबई के एटीएम से पैसे निकालते हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ आयुष अग्रवाल ने बताया कि देहरादून स्थित सरस्वती विहार नेहरु कॉलोनी निवासी पीड़ित ने जून में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर अभियोग पंजीकृत कराया। जिसमें पीड़िता ने बताया कि उसे टेलीग्राम के माध्यम से गत 12 मई को एक मैसेज आया था और उसे घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। घर बैठे पैसे कमाने की लालच में ठगों के बताए अनुसार हार्वे नॉर्मन नामक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की नामी कम्पनी के एक टेलीग्राम गुप में जुड़ गया, जिसका नाम हार्वे के उपकरण क्रू 1319 था। इस ग्रुप से उसे एक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराकर अकाउंट बनवाया गया, जहां वर्क फ्रॉम होम के नाम पर मिले टास्क को वेबसाइट में अपने अकाउंट में जाकर पूरा करना होता था। शुरू में इसके माध्यम से उसे 40 टास्क पूरे करने का लक्ष्य दिया गया था। टास्क पूरे करने पर कम्पनी से उसे 2500 रुपये उसके बैंक अकाउंट में प्राप्त हो गए। इसके बाद टास्क शुरू होने पर उसे फेडरल बैंक खाता में 10500 रुपये जमा करने को कहा गया। इसके बाद इनकी वेबसाइट पर बने उसके अकाउंट में 19000 रुपये ट्रांसफर किए गए। ग्रुप में जानकारी दी गई कि यदि आपने कम्पनी में बने अकाउंट को रिचार्ज नहीं किया तो आपके द्वारा कम्पनी में जमा किए गए पैसों के नुकसान के जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। इस कारण टास्क कम्पलीट करने के लिए इनके कहे अनुसार पीड़ित ने अलग-अलग अकाउंट में धनराशि जमा की। जैसे ही उनकी साइट में उसे प्रॉफिट के साथ 4175017 रुपये दिखा तो उसने कैश आउट करने का प्रयास किया। उसमें एक अलर्ट मैसेज आया कि आपको 50 प्रतिशत सिक्योरिटी के तौर पर जमा करना होगा, तभी आप पैसा निकाल पाओगे। स्वयं का पैसा निकालने के लिए बार-बार और अधिक पैसा जमा करने को कहने पर शक होने पर पीड़ित को अहसास हुआ कि साइबर ठगों ने स्वयं को हार्वे नॉर्मन नाम की कम्पनी का अधिकारी-कर्मचारी बताकर ऑनलाइन वर्क फ्राम होम के नाम पर उससे 21 लाख 19 हजार 371 रुपये की साइबर ठगी की गई है।
एसटीएफ ने प्लेटिना टावर की पार्किंग गुड़गांव हरियाणा से साइबर ठग प्रथम शौकीन (24) पुत्र अतुल शौकीन स्थायी निवासी मकान नंबर 399 ग्राम छावला थाना छावला नई दिल्ली वर्तमान पता मकान नंबर 85 अशोक विहार थाना सेक्टर-5 गुड़गांव हरियाणा, सुभाष शर्मा (25) पुत्र अनुप चन्द्र शर्मा निवासी मकान नंबर 219 बिजवासन थाना कापशेहेडा न्यू दिल्ली व मुकुल गोधारा (20) पुत्र कुलदीप गोधारा निवासी ग्राम धुलसीरस थाना द्वारिका सेक्टर-23 नई दिल्ली को गिरफ्तार किया। साथ ही घटना में प्रयुक्त बैंक खाते का एसएमएस एलर्ट नंबर संबंधित मोबाइल हैंडसेट सहित पांच मोबाइल, पांच क्रेडिट कार्ड, नौ एटीएम कार्ड व दो आधार कार्ड बरामद किए।
ऐसे करते थे ठगी
पूछताछ में पता चला कि साइबर ठग गिरोह का सरगना मुकुल गोधरा ने अपने परिचितों अथवा जरूरतमन्दों को कुछ रुपये देकर अथवा कमिशन देकर उनकी आईडी पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर धोखाधड़ी करता था। बैंक खातों को गिरोह के सदस्य प्रथम शौकीन व सुभाष शर्मा को उपलब्ध कराता था। ये सभी आपस में दुबई अगस्त, यूएसडीटी 97 हांगकांग, चीनी यूएसडीटी आदि व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से अपने अन्य साथियों सहित अंतरराष्ट्रीय विदेशी साइबर ठगों के सम्पर्क में थे। धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को विदेशों में बैठे साइबर ठगों की मदद से बाइनेंस एप, ट्रस्ट वैलेट के माध्यम से यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी खातों में स्थानान्तरित कर कमिशन के रूप में मुनाफा प्राप्त कर आपस में बांट लेते थे।
हवाई अड्डे पर पकड़े जाने के डर से दुबई से निकालते हैं पैसा
गिरफ्तार साइबर ठगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दुबई से पैसा निकाला न कि भारत से, क्योंकि उन्हें हवाई अड्डे पर बड़ी मात्रा में नकदी ले जाने पर पकड़े जाने का डर था। साथ ही दिरहम में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद रुपये की तुलना में सस्ती होती है।
इसके अलावा गिरफ्तार अभियुक्तों ने चीनी मास्टरमाइंड्स के लिए सीधे क्रिप्टोकरेंसी खरीदी, जिनके मोबाइल नंबर और चैट बरामद हुए हैं। उन्होंने 50 से अधिक फर्जी बैंक खाते खोले और इन फर्जी खातों को चीनी नागरिकों को बेचने के लिए कमीशन प्राप्त किया। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी भी भेजी। इन बैंक खातों में से कुछ के खिलाफ पूरे भारत में शिकायतें दर्ज हैं, जिनका विवरण संबंधित राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।