137वीं जयंती पर याद किये गये पूर्व मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत

137वीं जयंती पर याद किये गये पूर्व मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत

फतेहपुर, 10 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री व भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत को उनकी 137वीं जयंती पर जिले के कांग्रेसियाें ने श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया और उनके कार्यों को याद किया। गोविंद बल्लभ पंत प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के साथ ही देश के गृहमंत्री भी रह चुके थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में काम करते हुए जेल की यात्रा भी की। पंत एक अधिवक्ता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुशल राजनेता के रूप में याद किये जाते हैं।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के खूंट में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मनोरथ पंत और माता का नाम गोविंदी बाई था। पिता सरकारी कर्मचारी थे। जबकि, उनकी मां गृहणी थी। वर्ष 1899 में 12 साल की उम्र में ही उनका विवाह गंगा देवी नामक युवती के साथ हुआ था। जीबी पंत की प्रारंभिक शिक्षा साल 1897 में रामजे कॉलेज से हुई थी। पंत पढ़ाई-लिखाई में शुरू से ही काफी होशियार थे। जिसके चलते सभी शिक्षकों के प्रिय भी रहे। इंटर पास करने के बाद पंत ने तत्कालीन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से साल 1907 में राजनीतिक, गणित और अंग्रेजी साहित्य से बीए किया।

वहीं, साल 1909 में उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की। कॉलेज की ओर से उन्हें लम्सडेन अवॉर्ड भी दिया गया। इसके बाद वर्ष 1910 में वे अल्मोड़ा वापस आ गए। जहां उन्होंने वकालत शुरू कर दी। इसी सिलसिले में वे रानीखेत और काशीपुर में भी गए। काशीपुर में उन्होंने प्रेमसभा नाम से एक स्थानीय संस्था का गठन किया। गोविंद बल्लभ पंत विद्यार्थी जीवन में महात्मा गांधी के संपर्क में आने के बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। इसके बाद दिसंबर 1921 में गांधीजी के नेतृत्व में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया। पंत अगस्त 1925 में हुए काकोरी कांड में पकड़े गए दोषियों के समर्थन में खुलकर उन्हें छुड़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।

वर्ष 1930 में अंग्रेजों के उत्पीड़न के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दांडी यात्रा में शामिल हुए।जिसके बाद अंग्रेजों ने पंत समेत कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया था। गोविंद बल्लभ पंत वर्ष 1921, 1930, 1932 और 1934 के स्वतंत्रता आंदोलन में 7 साल जेल में बंद रहे। 17 जुलाई 1937 को गोविंद बल्लभ पंत संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) के पहले मुख्यमंत्री बने।

गोविंद बल्लभ पंत 1946 से दिसंबर 1954 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 21 मई 1952 को जमींदारी उन्मूलन कानून को प्रभावी बनाया था। उनकी कार्य क्षमता और कुशलता को देखकर उन्हें देश का गृह मंत्री भी बनाया गया था। साल 1955 से लेकर 1961 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने अपना अहम योगदान दिया। देश के लिए समर्पित और अहम योगदान के लिए गोविंद बल्लभ पंत को वर्ष 1957 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा गया।