प्रधानमंत्री ने राज्य का केंद्र सरकार पर कोल रॉयल्टी के बकाया के मुद्दे पर बात नहीं की : सुप्रियो भट्टाचार्य
रांची, 15 सितंबर (हि.स.)। जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जमशेदपुर आये। पहले से तय था कि वे यहां से छह वंदे मातरम ट्रेनों की शुरुआत करेंगे औऱ झारखंड को कुछ बड़ी सौगात देंगे।
सुप्रियो ने कहा कि हमें भरोसा था कि इसके साथ वे राज्य का केंद्र सरकार पर कोल रॉयल्टी का बकाया 01 लाख 36 हजार कोरड़ रुपये का भुगतान की घोषणा भी करेंगे लेकिन इन मुद्दों पर उन्होंने कोई बात ही नहीं की। उल्टा उन्होंने डिस्ट्रिक माईनिंग फाउंडेशन ट्रस्ट की बात की। कहा, ये सिर्फ झारखंड के लिए नहीं है। ये देश के उन सभी राज्यों के जिलों के लिए है, जहां माइन्स और मिनरल्स हैं। जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य रविवार काे पत्रकाराें से बातचीत कर रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि इन जिलों से जो रॉयल्टी आती थी, उसका सिर्फ नाम बदल कर डिस्ट्रिक माईनिंग फाउंडेशन ट्रस्ट कर दिया। ये कोई बहुत चमत्कार की बात नहीं थी, जिसकी चर्चा की गयी। दूसरी बड़ी बात उन्होंने ये कही कि पीएम आवास योजना को फिर से शुरू करेंगे। सुप्रियो ने कहा, आपको याद होगा कि 2014 और 2019 में वो बार-बार कहते थे कि 2022 तक देश के हर व्यक्ति का अपना घर होगा। इसका वादा वो 2014 और 2019 के चुनाव में बार-बार करते थे लेकिन सच्चाई में क्या हुआ। वित्तीय वर्ष 21-22 में उन्होंने पीएम आवास योजना को ही बंद कर दिया। तब झारखंड सरकार ने अपने सीमित संसाधन से अबुआ आवास योजना की शुरुआत की। इस दायित्व को हमने पूरा किया।
सुप्रियो ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से हताश दिखे। मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में पोटो हो का नाम लिया। इससे पहले पीएम मोदी ने कभी पोटो हो का नाम नहीं लिया था जबकि वे 2012 से झारखंड आ रहे हैं। चूंकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पोटो हो के नाम से युवा वर्ग के लिए योजना की शुरुआत की, तो मोदी को भी पोटो हो का ख्याल आया। कहा, हेमंत ने पोटो हो के नाम से ग्रामीण खेल योजना की शुरुआत की लेकिन इससे पहले प्रधानमंत्री या भाजपा के किसी नेता के मुंह से इस महान क्रांतिकारी और शहीद का नाम नहीं सुना गया। जेएमएम नेता ने कहा, जब वो संथाल जाते हैं तो फूलो झानो के नाम से हमारी योजना के माध्यम से वे इन वीर क्रांतिकारी संथाली महिलाओं से परिचित होते हैं। उन्हाेंने कहा कि इनको झारखंड के प्रतीकों के बारे में जानकारी ही नहीं थी।
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