रेलवे ट्रैक पर किसान आंदोलन: सीएम के खिलाफ अमृतसर-अंबाला मार्ग बाधित!

धान की सरकारी खरीद को लेकर किसान आज रेलवे लाइनों और सड़कों पर तीन घंटे के लिए जाम लगाकर बैठ गए हैं। इस आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी परेशानियों और नाराजगी को स्पष्ट रूप से व्यक्त करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शन और भाषण देना तो अच्छे से आता है, लेकिन राज्य की समस्याओं का समाधान करना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इस जाम के कारण अमृतसर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ा। अमृतसर से कई महत्वपूर्ण ट्रेनें संचालित होती हैं, जिससे इस इलाके के यात्रियों की समस्या और बढ़ गई है। बस स्टैंड पर भी यात्री परेशान हैं, खासकर जब आज दो छुट्टियों के बाद लोग अपने-अपने गंतव्यों की ओर निकल रहे थे, लेकिन यातायात ठप होने से उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

किसान मुख्यत: जालंधर-अंबाला रेल मार्ग पर वल्ला रेलवे स्टेशन के पास बैठे हैं और भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। किसान नेता परमिंदर सिंह पंडोरी ने प्रदर्शन के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि फसल बोने का समय हो या कटाई का, किसानों को हमेशा अपनी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ता है। पंडोरी ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि किसान खुद मान लें कि खेती अब लाभकारी नहीं है। ऐसे में अगर किसानों को एक किलो गेहूं भी मार्केट से खरीदना पड़ेगा, तब उन्हें अपनी स्थिति का एहसास होगा कि वे किसके लिए संघर्ष कर रहे थे।

पंडोरी ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पंजाब में चाहे कानून-व्यवस्था का मामला हो, खेती का हो या फिर कोई अन्य समस्या, सरकार हर मुद्दे पर फेल साबित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार धान की फसल को त्वरित रूप से मंडियों से नहीं उठवाएगी, तो वे अपने आंदोलन को तेज करेंगे। पंजाब में नशे की समस्या पहले ही गंभीर है, और अगर फसलों की रक्षा नहीं की गई, तो यह आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करेगा। इसीलिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी और वो अपने हक को लेकर डटे रहेंगे।

यह आंदोलन किसानों की समस्याओं को उजागर करने वाला एक बड़ा उदाहरण है। उनका कहना है कि वे अपने हक के लिए अंत तक लड़ेंगे और सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए बाध्य करेंगे। उनके इस जाम से राज्य का आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और आशा की जा रही है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र करेगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सरकार किसानों की मांगों पर उचित ध्यान देगी या यह संघर्ष और बढ़ता जाएगा।