होशियारपुर की डिप्टी कमिश्नर कोमल मित्तल और एसएसपी सुरिंदर लांबा ने आज टांडा ब्लॉक के विभिन्न गाँवों का दौरा किया, जिसमें बैंस अवान, पुल पुख्ता, दुबुर्जी, मियाणी, तल्ला, मदां, गिलजियां, कमालपुर, अलावल ईसा और बल्लरा शामिल हैं। इस कार्यकम में उनका साथ देने के लिए मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. दविंदर सिंह भी मौजूद थे। दौरे के दौरान, इन अधिकारियों ने किसानों से सीधे बातचीत की और उन्हें पराली जलाने की समस्या के प्रति जागरूक किया। उन्होंने किसानों को बताया कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को भी नुकसान पहुँचाता है, जिसके परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरक क्षमता में भी कमी आती है।
डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी ने किसानों को सलाह दी कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इस दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि वे बेलर मशीनों का उपयोग कर पराली को खेत से बाहर निकाल सकते हैं। इस संदर्भ में पूसव बायो फ्यूल के सेवक शर्मा और राणा इंटरप्राइज होशियारपुर के गुरप्रीत अटवाल को किसानों के साथ मिलकर पराली प्रबंधन पर जानकारी प्रदान करने के लिए जोड़ा गया।
इस बैठक में डिप्टी कमिश्नर ने किसानों को एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया कि जिले में शाम 7 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइन मशीनों से धान की कटाई पर रोक लगाई गई है। इससे आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। एसडीएम टांडा, पंकज कुमार, ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों के लिए आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराएं ताकि वे अपनी फसल की कटाई बिना किसी समस्या के कर सकें।
इस आयोजन में कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य कई अधिकारी भी उपस्थित थे, जिसमें एसपी सरबजीत बाहियां, डीएसपी टांडा दविंदर सिंह बाजवा, कृषि विकास अधिकारी डॉ. लवजीत सिंह, और एसएचओ टांडा गुरिंदरजीत सिंह नागरा शामिल थे। कृषि विभाग की टीम ने इस कार्यक्रम में किसानों को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया कि वे इन मशीनों का सही उपयोग करें और पराली जलाने से बचें। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. दविंदर सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई मशीनरी का अधिकतम लाभ उठाएं और साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा में भी अपनी भूमिका निभाएं।
इस प्रकार, यह दौरा न केवल किसानों को जागरूक करने के लिए था, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक के उपयोग में सहायता प्रदान करने के लिए भी था, जिससे कि वे कृषि में नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन कर सकें।