जगराओं में आढ़ती-मजदूरों का धरना: किसानों का समर्थन, मंडियों में धान खरीद का मुद्दा गरमाया

पंजाब सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के तीन दिन बाद भी जगराओं की अनाज मंडियों में धान की खरीद और उठान की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। खरीद एजेंसियों की ओर से भुगतान नहीं होने और तीसरे दिन भी रेट नहीं लगने के कारण स्थानीय मजदूरों ने मंडी का सारा कामकाज ठप कर दिया। इसके अतिरिक्त, मार्केट कमेटी कार्यालय के सामने धरना देकर उन्होंने विरोध दर्ज कराया और नारेबाजी की। भारतीय किसान यूनियन एकता डकोदा के सदस्य भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मंजीत सिंह धनेर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इस संकट में अयोग्य और बेईमान साबित हुए हैं।

धनेर ने आरोप लगाया कि सरकार ने दो दिन का वक्त मांगा था, लेकिन चार दिन बाद भी धान की खरीद और उठान का काम शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति और अधिक बिगड़ गई है क्योंकि मंडियों में धान की खरीददारी का कोई नामलेवा नहीं है। धनेर ने चेतावनी दी कि यदि 23 अक्टूबर की शाम तक उठान का काम शुरू नहीं हुआ, तो 24 अक्टूबर को पूरे पंजाब में सड़कें जाम की जाएंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अनाज खरीद प्रक्रिया को कॉरपोरेट्स को सौंपने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

प्रबंधन रिवोल्यूशनरी सेंटर पंजाब के नेता कंवलजीत खन्ना ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मंडियों को खत्म करने की योजना बना रहे हैं, जिसके पीछे उनका उद्देश्य अनाज के पूरे प्रबंधन को कॉरपोरेट्स के हाथों में सौंपना है। किसानों के अन्य नेताओं ने भी सरकार की नीतियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें जगतार सिंह देहडाका, तरसेम सिंह, और सुरजीत सिंह दोधर शामिल हैं। इन नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने इस समय अनाज व्यवस्था का भट्ठा बना दिया है।

प्रदर्शन के दौरान अन्य कई नेता भी उपस्थित थे, जैसे इंद्रजीत सिंह धालीवाल, जगजीत सिंह कलेर, और कुलदीप सहोता। उन्होंने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धनेर ने दर्शाया कि जगराओं और आस-पास की मंडियों में लगभग 8 लाख बोरी धान खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई हैं, जिसका सीधा नुकसान आढ़ती और मजदूरों को होगा। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 23 अक्टूबर तक कोई समाधान नहीं हुआ, तो वे 24 को चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे।

इन समस्त घटनाक्रमों के पीछे किसानों की नाराजगी और सरकार के प्रति बढ़ती असंतोष की भावना स्पष्ट होती है। सरकार को चाहिए कि वह जल्दी से जल्दी समस्या का समाधान करे, अन्यथा किसानों का गुस्सा और बढ़ सकता है, जिससे आने वाले समय में राज्य में और ज्यादा तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में सरकार के लिए यह एक महत्वपूर्ण चिरस्थायी मुद्दा बन सकता है, जिसे संज्ञान में लेने की आवश्यकता है।