पंजाब के नवांशहर क्षेत्र की तहसील बलाचौर के एडीबी बेला ताजोवाल गांव में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक 35 वर्षीय युवक चरणजीत सिंह ने अपने ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि उसने जहरीले पदार्थ का सेवन किया और इसके साथ ही उसने एक वीडियो भी बना कर उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। यह वीडियो उस समय सामने आया जब स्थानीय ग्रामीणों ने इसे देखा और मृतक के परिजनों को इसकी जानकारी दी। जब परिजनों ने युवक को देखने के लिए अस्पताल पहुंचाए तो उसे अचेत अवस्था में पाया गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चरणजीत सिंह गांव में खेती करता था और उसके एक 5 साल का बेटा भी है। मृतक के परिजनों का कहना है कि वह लंबे समय से अपने ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित हो रहा था। पत्नी और ससुराल वालों से झगड़ने के कारण उसका मानसिक तनाव बढ़ चुका था। चरणजीत ने अपने ससुराल से लगभग 11 लाख रुपए भी लेन-देन किए थे, जिसे लेकर वह परेशान था। जब भी उसने इस विषय पर अपनी पत्नी से बात की, दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था। हाल ही में, उसकी पत्नी ने तलाक के बाद घर लौटने का निर्णय लिया था और उन्हें इस बात को लेकर 2 दिन पहले झगड़ा हुआ। इस झगड़े का नतीजा यह हुआ कि उसके ससुराल वालों ने उसकी पत्नी और बच्चे को ले जाने का फैसला किया, जिससे चरणजीत मानसिक दबाव में आ गया और उसने आत्मघाती कदम उठाने का निर्णय लिया।
काठगढ़ पुलिस थाना के प्रमुख अधिकारी रणजीत सिंह ने कहा कि वे मामले की गहन जांच कर रहे हैं। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर बलाचौर के सरकारी अस्पताल में रखवा दिया है। परिजनों के बयानों और संदिग्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मामला दर्ज किया जाएगा। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद इसे निकटतम परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
इस घटना ने समाज में पारिवारिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर एक बार फिर से ध्यान खींचा है। ससुराल वालों द्वारा उत्पीड़न और मानसिक यातनाओं की बात अक्सर सुनी जाती है, लेकिन इस तरह का गंभीर कदम उठाने के मामले समाज की सोच पर सवाल उठाते हैं। यह घटना न केवल एक परिवार को तोड़ती है, बल्कि इसके पीछे छिपे मुद्दों पर भी गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। पुलिस जांच का मुख्य उद्देश्य उन पहलुओं को उजागर करना है, जो इस प्रकार की समस्याओं का कारण बनते हैं, ताकि भविष्य में ऐसे मामले फिर से न हों।
यह घटना सभी को एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमें पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को समझने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है, ताकि ऐसे दुखद मामलों की पुनरावृत्ति न हो सके।