पटियाला जिले में सरपंच और पंच के पद के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान उठे विवाद और आरोपों के बाद, अब 3903 उम्मीदवार चुनावी मैदान में मौजूद हैं। जिला प्रशासन ने लगभग 1100 नामांकन पत्रों को रद्द करते हुए सरपंच के लिए 3903 और पंच के लिए 10950 उम्मीदवारों को वैध मान लिया है। इस स्थिति के बीच, राजपुरा में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने विधायक पर आरोप लगाते हुए सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और सड़क पर धरना दिया।
धरना में शामिल नेताओं में कांग्रेसी हरदयाल कंबोज और अकाली दल के नेता हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा शामिल थे। चंदूमाजरा ने आरोप लगाया कि यह एक प्रकार से लोकतंत्र की हत्या है। हालांकि, कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी के उम्मीदवारों ने अंततः धरने को समाप्त कर दिया। इस संदर्भ में, विधायक नीना मित्तल ने विरोधियों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन कर रही है और विरोधी सिर्फ हार की चिंताओं में फंसे हुए हैं।
भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की बात करें, तो भुन्नरहेड़ी में 144 ग्राम पंचायत के लिए 492 सरपंच और 1217 पंच उम्मीदवार हैं। घनौर में 85 ग्राम पंचायतों के लिए 391 सरपंच और 1010 पंच उम्मीदवार हैं, जबकि नाभा की 141 ग्राम पंचायतों के लिए 208 सरपंच और 1524 पंच उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा में हैं। पटियाला के 100 ग्राम पंचायतों में 422 सरपंच और 1152 पंच उम्मीदवार हैं। पटियाला रूरल के 60 ग्राम पंचायतों के लिए 219 सरपंच और 824 पंच ने अपना नामांकन किया है।
इसी क्रम में, पातड़ां की 105 ग्राम पंचायतों के लिए 492 सरपंच और 1165 पंच उम्मीदवार हैं। राजपुरा में 95 ग्राम पंचायतों के लिए 36 सरपंच और 1034 पंच उम्मीदवार जबकि समाना में 102 ग्राम पंचायतों के लिए 386 सरपंच और 1005 पंच की उम्मीदवारी की गई है। सनौर के 100 ग्राम पंचायतों के लिए 280 सरपंच और 905 पंच हैं, जबकि शंभू कलां की 90 ग्राम पंचायतों में 346 सरपंच और 1114 पंच चुनावी दौड़ में शामिल हैं।
इस प्रकार, पटियाला जिले में चुनावी माहौल काफी गर्म है, जहां राजनीतिक दल अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। विधायक नीना मित्तल का कहना है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से संचालित किया जा रहा है। जबकि विपक्षी पार्टियां लगातार विरोध के स्वर में हैं, यह देखना बाकी है कि चुनाव में वास्तविकता क्या होती है। राजनीति में सच्चाई और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना ही लोकतंत्र की बुनियाद है।