पटियाला में बवाल: उम्मीदवारों का हंगामा, नामांकन कागजों में गड़बड़ी का आरोप!

पटियाला के साहिब नगर थेड़ी, जलालपुर और अन्य गांवों के सरपंच पद के उम्मीदवारों ने अपने नामांकन के कागजात रद्द करने और उन्हें स्वीकार न करने की शिकायत करते हुए राजपुरा रोड पर विरोध प्रदर्शन किया। ये सभी उम्मीदवार मंगलवार को दोपहर लगभग एक बजे राजपुरा सदर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। दो घंटे तक धरने पर बैठे इन लोगों से बातचीत करने के लिए थाना सदर पटियाला के एसएचओ गुरप्रीत सिंह पहुंचे, लेकिन बातचीत में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। विरोध प्रदर्शन में शामिल बीजेपी पंजाब महिला प्रधान जय इंदर कौर, केके शर्मा और कांग्रेस के नेता ने मांग की कि डिप्टी कमिशनर या एसडीएम मौके पर आकर स्थिति का जायजा लें, तभी वे धरना समाप्त करेंगे।

इस धरने का आयोजन उस समय हुआ जब बीडीपीओ कार्यालय में सरपंच और पंच के उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की प्रक्रिया चल रही थी। जब उम्मीदवार बीडीपीओ कार्यालय पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उनके कागजात रद्द कर दिए गए हैं, जिससे वहां हंगामा मच गया। साहिब नगर थेड़ी के सिकंदर सिंह, सलीम और जलालपुर के रवि ने बताया कि सत्ताधारी विधायकों के दबाव में बीडीपीओ कार्यालय ने धक्केशाही की। पहले तो उनके नामांकन के कागजात को स्वीकार नहीं किया गया और फिर कमी निकाली गई, जिसके आधार पर उनके कागजात को रद्द कर दिया गया।

इस धक्केशाही के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जब इन उम्मीदवारों ने सड़क जाम करने का निर्णय लिया, तो बीडीपीओ ऑफिस का जिम्मेदार व्यक्ति वहां से गायब हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि बीडीपीओ सही तरीके से अपनी ड्यूटी निभा रहे होते तो उन्हें मौके पर आकर उनके साथ बातचीत करनी चाहिए थी। उम्मीदवारों में नाराजगी है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और वे अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर हो गए हैं।

इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन के कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब लोकतंत्र में जनहित के मुद्दों की अनदेखी की जाती है, तो इससे जनता के बीच असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है। वे सभी एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर दृढ़ हैं और अधिकारियों की निष्क्रियता के खिलाफ अपने हक के लिए संघर्ष करने का फैसला किया है। आगे की स्थिति में अगर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया तो यह आंदोलन और भी उग्र हो सकता है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बन सकता है।

यह घटना पटियाला जिले के राजनीतिक परिदृश्य को और भी रोमांचक बनाती है, जहां चुनावी प्रक्रिया के दौरान ऐसी बाधाएं और विरोधी विचारों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि वह इन मांगों को गंभीरता से ले और समस्या का समाधान जल्द से जल्द करे, ताकि चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।