आप नेता का गुस्सा किसानों पर: हड़ताल से कारोबार तबाह, उद्योग पलायन, जनता परेशान!

पंजाब के किसान नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को राज्य के 30 से अधिक स्थानों पर हाईवे जाम कर दिए, जिसके चलते आम जनता को चार घंटे तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस धरने को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता कीमती भगत ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लाइव आकर कहा कि किसानों के लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण पंजाब की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब ऐसे विरोध प्रदर्शनों के चलते व्यापार ठप्प हो जाता है और इंडस्ट्रियां अन्य राज्यों की ओर चली जाती हैं।

भगत ने स्पष्ट रूप से कहा, “हाईवे जाम के चलते पूरे राज्य को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। यह कोई एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि हर कुछ दिनों में धरने लगाकर हाईवे बंद किए जाते हैं, जो बहुत चिंताजनक है।” उन्होंने किसानों के नेताओं से सवाल करते हुए पूछा, “क्या आप पंजाब को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं?” उनका मानना है कि जो भी कुछ कारोबार अभी चल रहा है, उसे चलने दिया जाए। ऐसा करना आवश्यक है ताकि यहां की उद्योगों को बचाया जा सके।

उन्होंने विशेष रूप से बताया कि पंजाब में अब कोई नई इंडस्ट्री स्थापित करने को तैयार नहीं है। भगत ने जोर देते हुए कहा कि शंभू बॉर्डर पर लगने वाला धरना भी राज्य के व्यापार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाला था। उन्होंने उल्लेख किया कि विभिन्न प्रकार की उद्योगें, जैसे खेल सामान, स्टील और लोहे की उद्योग, बंद होने के कगार पर हैं। इस समस्या को समाधान करने की जरूरत है, ताकि उद्योगों को समुचित समर्थन मिल सके।

कीमती भगत ने किसानों से एक विनम्र अपील की कि अगर उनकी लड़ाई केंद्रीय सरकार के खिलाफ है, तो उन्हें वैकल्पिक तरीके से अपने मुद्दों को सुलझाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि वे केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर अपनी समस्याओं पर चर्चा करें, बजाय इसके कि आम जनता को परेशान करें। उनके अनुसार, यह सही नहीं है कि धरने के माध्यम से नागरिकों का जीवन कष्टमय किया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले एक साल में शंभू बॉर्डर पर चलने वाले धरने ने अरबों रुपये के कारोबार को नष्ट कर दिया है।

इस प्रकार, कीमती भगत का मानना है कि ऐसा लगातार हो रहा विरोध पंजाब के व्यापारिक माहौल को खराब कर रहा है। यदि इस प्रवृत्ति को रोका नहीं गया, तो इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। उनका संदेश सीधा था – किसानों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका ऐसा होना चाहिए कि उससे आम जनजीवन प्रभावित न हो। केवल इसी तरह से पंजाब को एक बार फिर से प्रगति की राह पर लौटा सकते हैं।