अबोहर: कांग्रेस का हंगामा, नामांकन रद्दीकरण पर हाईवे जाम करने की चेतावनी!

अबोहर में पंचायत चुनावों के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान काफी संख्या में नामांकन पत्रों को रद्द कर दिया गया, जिसे लेकर आज कांग्रेस पार्टी ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई गाँवों की पूरी पंचायतों के नामांकन पत्र समाप्त कर दिए गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस स्थिति को ठीक नहीं किया, तो वे पंचायत चुनावों को रोक देंगे।

कांग्रेस के जिला सीनियर उप प्रधान, सुधीर भादू ने कहा कि चुनाव कार्यालय ने देर रात उन उम्मीदवारों की सूची लगाई थी जिनके नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए। इस सूची में गांव कुंडल, बहादुरखेड़ा, न्यू महेन्द्र नगर, पटी सदीक और काला टिब्बा जैसे स्थानों की पूरी पंचायतें शामिल थे। उन्होंने ये भी बताया कि चुनाव आयोग द्वारा नामांकन पत्र जमा करने के लिए उम्मीदवारों को बहुत कम समय दिया गया था, जबकि दूसरी ओर अधिकारियों ने उचित एनओसी हासिल करने में कठिनाईयाँ उत्पन्न कीं।

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि जिस वक्त उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए, तभी उन पर गलतियों का आरोप लगाते हुए उन्हें रद्द कर दिया गया। यह स्थिति बहुत ही निंदनीय है और इससे साफ है कि प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें परेशान करने का काम किया है।

धरना शुरू होते ही पुलिस भी सक्रिय हो गई। डीएसपी सुखविंद्र सिंह ने मौके पर पहुँचकर धरने में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत शुरू की। लोगों का यह मानना है कि यदि उनके नामांकन पत्रों को स्वीकार नहीं किया गया, तो वे सीधे नेशनल हाईवे को जाम करने का निर्णय लेंगे। कांग्रेस के नेता मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं और मामले को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

कांग्रस पार्टी के इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन के लिए भी चुनौती पेश कर दी है। प्रशासन को चाहिए कि वह स्थिति को गंभीरता से लेकर समस्या का समाधान जल्द से जल्द करें ताकि चुनाव प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए और उम्मीदवारों को उनके अधिकार मिल सकें। राजनीतिक संकट की इस स्थिति में अब देखना यह होगा कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या वह चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रखने में सफल होता है या नहीं।