श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार, विरसा सिंह वल्टोहा ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल की प्राथमिक सदस्यता से बाहर निकलने की घोषणा सोशल मीडिया के जरिये की। वल्टोहा ने लिखा कि उन्होंने सिंह साहिबों के समक्ष पेश होने के बाद जो आदेश जारी किया गया उसे पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अकाली दल के नेतृत्व का आदर करते हैं और उनके दिल में अकाली खून बहता है। इससे पहले, उन्होंने इसे एक साहसिक कदम बताया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अकाली दल के अंदर कुछ दिक्कतें हैं।
इससे पहले, वल्टोहा ने आरोप लगाया था कि कुछ व्यक्ति अकाली दल के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह किसी प्रकार के दबाव में नहीं हैं। उनका अनुरोध है कि उनके विचार और स्पष्टीकरण को सार्वजनिक किया जाए ताकि सत्यता सामने आ सके। वल्टोहा ने विशेष रूप से ज्ञानी रघबीर सिंह से आग्रह किया कि पेशी के दौरान की वीडियोग्राफी को मीडिया के सामने लाया जाए। वह यह भी चाहते हैं कि उनके स्पष्टीकरण पत्र और उस पेन ड्राइव को बांटा जाए जिसमें कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब ने निर्देश दिए हैं कि वल्टोहा को पार्टी से निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाए। पार्टी के कार्यकारी प्रधान बलविंदर सिंह को 24 घंटे के भीतर यह काम करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही वल्टोहा की पार्टी में वापसी पर दस साल की रोक लगाने की बात भी कही गई है। ऐसा आरोप लगाया गया है कि वल्टोहा ने विश्वासघात किया है और उन्होंने अन्य नेताओं के खिलाफ भी कुछ आपत्तिजनक बातें की हैं।
श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेश के बाद, वल्टोहा को 15 अक्टूबर को सबूतों के साथ पेश होने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए पहले हीुणि́ कुछ गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ कार्रवाई में देरी होने की बात कही थी। उनका कहना है कि इस दिशा में अन्य सिख नेताओं पर भी दबाव डाला जा रहा है। वल्टोहा के अनुसार, यह कांग्रेस द्वारा नहीं, बल्कि कुछ अन्य शक्तियां सिख नेताओं के निर्णय को प्रभावित कर रही हैं।
विरसा सिंह वल्टोहा की स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि शिरोमणि अकाली दल में अंदरूनी राजनीतिक हलचलें चल रही हैं। सीधा दोषारोपण और आरोपों के बीच वल्टोहा ने व्यक्तिगत रूप से कुछ बयानों का सामना करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय की संस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि है और इन्हें किसी भी प्रकार की साजिश से दूर रखा जाना चाहिए। उनकी इस स्थिति ने अकाली दल के भीतर के समीकरणों को एक नया मोड़ दे दिया है, जो भविष्य में और अधिक चर्चाओं का विषय बनेगा।