पंजाब और चंडीगढ़ में मौसम में बदलाव आने वाला है। आज सोमवार की रात से फिर से मौसम की गतिविधियाँ तेज होंगी। आने वाले दो दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। शनिवार रात को सक्रिय हुए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सर्कुलेशन के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाएँ चलीं, जिसके कारण मौसम में ठंडक आई है। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जो अब सामान्य तापमान के स्तर के करीब पहुंच गया है। इस दौरान पटियाला में सबसे अधिक तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। सभी जिलों में तापमान में गिरावट देखने को मिली है।
जलवायु परिवर्तन के कारण आंधी और बारिश ने पावरकॉम को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है। शनिवार की रात को तेज आंधी के चलते बिजली की ढांचे को काफी क्षति पहुँची। कई इलाकों में बिजली सप्लाई बाधित हुई और इस वजह से कई बिजली के खंभे गिर गए। नुकसान की बात करें तो लगभग 130 ट्रांसफार्मर और 580 से अधिक 11 केवी के बिजली के खंभे तथा तार टूटने से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस संकट का सबसे गंभीर असर अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर समेत अन्य क्षेत्रों में देखने को मिला है, जहाँ 296 पोल और 27 ट्रांसफार्मर टूट गए हैं।
इस प्राकृतिक आपदा ने कृषि क्षेत्र में भी प्रभाव डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। खेतों में खड़ी चावल की फसल बिछ गई है, जिससे किसानों की चिंताएँ और बढ़ गई हैं। पावरकॉम ने रिपोर्ट किया है कि नुकसान का आकलन करने के लिए सभी जिलों से जानकारी एकत्रित की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आवश्यक सुधार कार्य किए जा सकें। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में बिजली की शीघ्र बहाली के प्रयासों की व्यवस्था की जा रही है।
इस मौसम परिवर्तन के चलते लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। मौसम विभाग ने आगाह किया है कि इस दौरान गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जिससे सड़क यातायात पर भी असर पड़ सकता है। नागरिकों से अपील की गई है कि यदि संभव हो तो बारिश के दौरान घर से बाहर न निकलें और अगर निकलें तो सुरक्षा उपायों का ध्यान रखें। परिवहन निगम भी स्थिति का आकलन कर रहा है जिससे यात्रा को प्रभावित करने वाले स्थानों पर आवश्यक सूचनाएँ फौरन प्रदान की जा सकें।
अंत में, यह अत्यावश्यक है कि प्रशासन और स्थानीय निकाय इस संकट से निपटने के लिए तत्पर रहें और जरूरतमंदों की सहायता हेतु ठोस कदम उठाएँ। मौसम की अनिश्चितताओं के बीच, सभी को सतर्क रहना होगा और तैयारियों को बढ़ाना होगा। ऐसे दुष्प्रभावों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की आपदाओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।