अकाली दल का बड़ा कदम: जत्थेदार से मुलाकात और सरकार को धान लिफ्टिंग पर अल्टीमेटम!

पंचायत चुनावों से सिर्फ एक दिन पहले, शिरोमणि अकाली दल (SAD) की कोर कमेटी की बैठक रविवार को आयोजित की गई। यह बैठक लगभग चार घंटे तक चली, जिसमें पंचायत चुनावों के साथ-साथ मंडियों में धान की लिफ्टिंग से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और रणनीति बनाई गई। बैठक के बाद, SAD के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब पर एक मामला चल रहा है, जिसके संबंध में अकाली दल के अध्यक्ष और अन्य नेताओं ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि कई नई बातें सामने आई हैं, जिसके लिए एक 11 मेंबरी कमेटी अब अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से मिलने की योजना बना रही है।

डॉ. चीमा ने जानकारी दी कि सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंडियों में धान के पहाड़ लगे हैं, लेकिन उनकी लिफ्टिंग नहीं हो रही है, जिससे किसान परेशान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस मुद्दे का समाधान नहीं करती है, तो अकाली दल किसानों के समर्थन में सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार फसल की लिफ्टिंग में सक्षम नहीं है, तो सत्ता को छोड़ दें।

बैठक में पंचायत चुनावों पर भी गहन चर्चा की गई। डॉ. चीमा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों में हस्तक्षेप किया है, जो कि कांग्रेस के शासनकाल से भी अधिक गंभीर है। उन्होंने कहा कि पहले लोगों को नामांकन भरने की अनुमति नहीं दी गई और जिन्हें नामांकन भरने का मौका मिला, उनके जाली हस्ताक्षर कर नामांकन वापस ले लिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका भी संदिग्ध रही है।

इस बात पर भी चर्चा की गई कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कुछ लोगों को राहत दी है। चूंकि सोमवार को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई है, उन्होंने सरकार से विनती की कि AG ऑफिस लोगों के अधिकारों के पक्ष में खड़ा हो और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह माना जाएगा कि यह सब सरकार की शह पर हो रहा है।

अंत में, कोर कमेटी की इस बैठक में देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। इसके साथ ही, पंजाब में चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों की चर्चा हुई। इन सीटों में चब्बेवाल, डेरा बाबा नानक और बरनाला शामिल हैं, जिनके वर्तमान विधायक अब सांसद बन चुके हैं। बैठक में पिछले हलकों का दौरा करने के बाद प्राप्त फीडबैक पर भी चर्चा की गई, जिससे यह बात स्पष्ट होती है कि अकाली दल अपने अगामी चुनावी योजनाओं में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।