पंजाब में हाईकोर्ट से 3 घंटे की पैरोल: भाई के भोग में शामिल होंगे राजोआना!

पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के जिम्मेदार बलवंत सिंह राजोआना को बुधवार को एक विशेष अवसर पर तीन घंटे की पैरोल दी गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह पैरोल उन्हें सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक के लिए मंजूर की है। इस मौके पर, बलवंत सिंह को अपने बड़े भाई कुलवंत सिंह के भोग में शामिल होने के लिए यह अनुमति दी गई है। वह इस दौरान लुधियाना स्थित अपने पैतृक गांव में जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2021 में उन्हें अपने पिता के भोग में शामिल होने के लिए सिर्फ एक घंटे की पैरोल दी गई थी।

कुलवंत सिंह राजोआना का निधन चार नवंबर को कनाडा में हुआ था। उनके निधन के बाद, परिवार द्वारा उनके भोग को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह कार्यक्रम उनके पैतृक गांव रोजाना कलां में रखा जाएगा। बलवंत सिंह को इस याचिका के माध्यम से पैरोल लेने की सुविधा मिली, जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इस दौरान उनकी सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए जाएंगे, और बाद में उन्हें फिर से पटियाला जेल में लौटना होगा।

दिलचस्प बात यह है कि कुलवंत सिंह अपने बेटे से मिलने के लिए हाल ही में कनाडा गए थे, जहाँ उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया और वह चल बसे। बलवंत सिंह के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है, और अब उनके पास केवल दो भतीजे और कुछ अन्य रिश्तेदार बचे हैं। बलवंत सिंह राजोआना पिछले 28 वर्षों से जेल में बंद हैं और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। इस सजा के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को राष्ट्रपति के पास भेज दिया है, और राष्ट्रपति के सचिव को भी निर्देश दिया है कि इसे राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने उन्हें आग्रह किया है कि इस मामले पर जल्द से जल्द, यानी दो हफ्तों के भीतर, फैसला लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए। बलवंत सिंह के मामले में विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह मामला न केवल कानून और व्यवस्था से संबंधित है, बल्कि इसमें भावनात्मक तत्व भी शामिल हैं जो उनके परिवार और समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।

राजोआना के लिए मिली यह पैरोल इसलिए अहम है क्योंकि यह उन्हें अपने पारिवारिक नुकसान के समय, जब वह अपने भाई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यों में शामिल हो सकते हैं, एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। ऐसे मामलों में न्यायिक प्रणाली की निस्पक्षता और मानवता की भावनाओं को समझा जाना चाहिए, ताकि परिवारों को इस प्रकार के गंभीर अध्यायों का सामना करने में सहारा मिल सके।