बरनाला में बवाल: प्रताप सिंह का दावा, AAP सीएम मान निभाएंगे एकनाथ शिंदे का रोल!

पंजाब के बरनाला में कांग्रेस पार्टी ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (AAP) को कठघरे में खड़ा किया गया। कांग्रस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भाजपा के साथ मिलीभगत में हैं और यह स्थिति पंजाब के किसानों और आम जनता के लिए चिंताजनक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान का रवैया खिलवाड़ के समान है, क्योंकि वह भाजपा के नेताओं से करीबी संपर्क में हैं, जिसने पंजाब के धान का उत्पादन प्रभावित किया है।

बाजवा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर पंजाब को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है, जबकि पिछले 60 वर्षों से प्रदेश में धान और गेहूं की खरीदारी की जा रही है। उनका कहना था कि सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा के बंद होने से पंजाब के किसानों को होने वाले नुकसान का ठीकरा भाजपा के सिर फूटा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि आम आदमी पार्टी ने हरियाणा को नए विधानसभा भवन के लिए जमीन देकर स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है, जिससे चंडीगढ़ पर हरियाणा का दावा मजबूत हो गया है।

उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह की बातों का संदर्भ देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल द्वारा किए गए वादे अब खोखले साबित हो गए हैं। केजरीवाल यह दावा करते थे कि उनकी सरकार बनने के बाद कोई किसान आत्महत्या नहीं करेगा, लेकिन हाल ही में संगरूर में एक किसान ने फसल न बिकने के कारण आत्महत्या कर ली। बाजवा ने कहा कि यह दर्शाता है कि आम आदमी पार्टी ने किसानों के हितों की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया है।

कांग्रस नेता ने पंजाब में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भी चिंता जताई और कहा कि राज्य में गैंगस्टरों का राज चल रहा है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्थिति को सामान्य बनाए रखने में असफलता दिखाई है। उन्होंने बताया कि बरनाला जिले में सुरक्षा बलों की संख्या और मुख्यमंत्री के परिवार की सुरक्षा के बीच भारी असंतुलन है, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं का पता चलता है।

बाजवा ने अंत में पंथक वोट के मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा कि शिरोमणि अकाली दल का हाल हरियाणा के चौटाला की तरह होगा, अगर पंथक वोट भाजपा के पक्ष में चला गया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बरनाला जिला कांग्रेस द्वारा गठित किया गया था और इसे किसी एक नेता के कहने पर नहीं, बल्कि आवश्यकता और हालात के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया के तहत स्थापित किया गया था। इस तरह, कांग्रस पार्टी ने विपक्ष की खिलाड़ियों की भूमिका को बखूबी उजागर किया है और जनता के बीच अपनी बात रखने में सफल रहीं हैं।