पंजाब में उबाल: पीआरटीसी कर्मचारियों का रोष मार्च, वादाखिलाफी पर सरकार से नाराज़गी!

पंजाब के बरनाला में प्रदेश की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ पीआरटीसी (पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन) कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों और आस-पास के गांवों में रोष रैली का आयोजन किया। इस रैली में कर्मचारियों ने AAP सरकार पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए अपना गुस्सा व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान, पीआरटीसी के कर्मचारी सुखपाल सिंह और निरपाल सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे पिछले कई वर्षों से सेवा में हैं, फिर भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

सुखपाल सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने चुनाव से पहले वादा किया था कि उनकी नियमितीकरण की घोषणा पहली कैबिनेट मीटिंग में की जाएगी, लेकिन ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनकी सेवाओं को नियमित नहीं किया गया। निरपाल सिंह ने कहा कि सरकार ने उनके साथ कई बार बैठकें की हैं, जहां उनकी समस्याओं को माना गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस प्रकार, सरकार के सही कार्यों का अमल न होने के कारण कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है।

बरनाला हलके के पीआरटीसी कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को हल कराने के लिए सरकार से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ उन्होंने आज हलके में कच्चे कर्मचारियों की ओर से एक रोष मार्च आयोजित किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कर्मचारियों में सरकार के प्रति निराशा की भावना बढ़ती जा रही है।

अगर उनकी मांगों को तुरंत लागू नहीं किया गया, तो इन कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वे अपने संघर्ष को और अधिक तेज करेंगे। उनका यह कदम न केवल अपनी मांगों के लिए है, बल्कि यह अन्य कर्मचारियों के हक में भी लड़ाई है। वे बार-बार सरकार से उचित कार्रवाई की अपील कर रहे हैं और नियमितीकरण के इस मामले को लेकर समाज के हर वर्ग का ध्यान खींचना चाहते हैं।

इस तरह, यह प्रदर्शन स्थायी रूप से उन कर्मचारियों की समस्याओं को उजागर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो लंबे समय से उनकी मांगों के लिए लड़ाई लड रहे हैं। हालात को ध्यान में रखते हुए, यह स्पष्ट है कि बरनाला के पीआरटीसी कर्मचारियों का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा जब तक कि उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।