भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने धान की लिफ्टिंग और डीएपी के मुद्दों को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवारों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का ऐलान किया है। संगठन ने बताया है कि वे 14 नवंबर से 19 नवंबर तक गिद्दड़बाहा और बरनाला में गाँव-गाँव जाकर दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। संगठन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां और महासचिव सुखदेव सिंह ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी है। इसके साथ ही, यह भी बताया गया कि कल सोमवार को बरनाला के डीसी का घेराव करने की योजना बनाई गई है। किसानों ने यह स्पष्ट किया है कि टोल प्लाजा पहले की तरह ही मुफ्त रहेंगे।
किसान नेताओं ने कहा कि वे पूरी तरह成熟 धान की कटाई कर रहे हैं और उसे मंडियों में लाने का काम कर रहे हैं। लेकिन साथ ही, उन्होंने चिंता जताई कि उच्च आर्द्रता का कारण ठंड और ओस का बढ़ना है, जो मुख्यतः देर से कटाई के कारण हुआ है। उन्हें यह भी लगता है कि पंजाब सरकार की ओर से बिजली आपूर्ति में देरी ने बुआई को प्रभावित किया है, जोकि फसल पकने में भी बाधा डाल रहा है। किसानों ने संकेत दिया कि उन्हें खरीद या भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का घेराव करने की तैयारी है।
किसानों ने यह घोषित किया है कि वे अब पूरे पंजाब में मंडियों की निगरानी रखने के लिए एक संयुक्त काफिले का निर्माण करेंगे। इसके अतिरिक्त, किसानों ने एनजीटी द्वारा दिए गए आदेश के संबंध में चिंता जताई है कि पराली जलाने के लिए प्राथमिकताएँ और आवश्यक मशीनें राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिसके चलते उन्हें इस समस्या का समाधान न पाए जाने पर पराली जलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इससे पहले, बरनाला और गिद्दड़बाहा में किसानों ने भाजपा और आप के उम्मीदवारों के आवासों के बाहर पक्के मोर्चे लगाए थे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं और अन्य जिलों से भी लोग इस आंदोलन में शामिल होने के लिए आएंगे। संगठन ने यह भी कहा कि उनकी यह लड़ाई मजबूरी के चलते शुरू हुई है और किसान अपने हक के लिए आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। इसका संकेत पहले भी दिया गया था जब भाजपा और AAP के नेताओं के आवासों के बाहर पक्के मोर्चे स्थापित किए गए थे।
किसान यूनियन ने इस आंदोलन को एक महत्वपूर्ण कदम माना है ताकि उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जा सके। उन्होंने यह आग्रह किया है कि सरकार उन्हें आवश्यक संसाधन मुहैया कराए, ताकि वे अपनी फसल की कटाई और प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक उपाय कर सकें। अब देखने यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर कितना ध्यान देती है और किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे करती है।