गुरदासपुर में रात की चुप्पी में अवैध माइनिंग का धंधा, अधिकारी लगाएंगे रोक!

पंजाब के गुरदासपुर जिले में रावी नदी के किनारे रात के अंधेरे में अवैध रेत खनन का मामला तेजी से बढ़ रहा है। बहरामपुर थाना क्षेत्र के मराडा इलाके में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से रेत का खनन किया जा रहा है। इस अवैध गतिविधि में रात के समय करीब आठ टिप्पर रेत की ढुलाई में लगे हुए हैं। यह चिंता का विषय है कि इसIllegal mining के बीच भी पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभाग पूरी तरह से मौन हैं।

इंद्रपाल सिंह बैंस, भारतीय किसान यूनियन चडूनी के युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष, ने इस स्थिति पर गंभीरता से चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह अवैध खनन न केवल स्थानीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि यह माफिया के राजनीतिक संरक्षण का भी संकेत है। बैंस का आरोप है कि पुलिस व अन्य सरकारी अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद कोई भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह अवैध गतिविधि तुरंत नहीं रोकी गई, तो वे किसान संगठनों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

माइनिंग विभाग के अधिकारी दिलप्रीत सिंह ने हालांकि इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह खनन क्षेत्र गुरदासपुर की सीमा के भीतर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि वहां पानी की मात्रा अधिक है और वास्तविक स्थिति को जानने के लिए मौके पर जाकर निरीक्षण करना होगा। उनका आश्वासन है कि अगर कोई सहलापन या अवैध खनन किया गया है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस संदर्भ में थाना बहरामपुर के एसएचओ ओंकार सिंह का भी बयान आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच करेंगे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि के पास अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना था कि जो टिप्पर रात में रेत लेकर आते हैं, वे कीड़ी गांव और पठानकोट के इलाकों से रेत लेकर गुजरते हैं।

गुरदासपुर में चल रही इस अवैध रेत खनन की गतिविधि ने स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। कहीं न कहीं यह अवैध खनन स्थानीय विकास और पर्यावरण के लिए खतरा बन गया है। किसान नेता और स्थानीय जनता अब इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए संगठित हो रहे हैं। देखना यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मसले का समाधान निकाल पाएगा या फिर स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन कर इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचने में सफल होंगे।