IPS बनकर नशे से लड़ने वाली SSP अश्विनी गोत्याल ने छात्राओं संग साझा किया बचपन का राज!

14 नवंबर को हर साल देशभर में बाल दिवस मनाया जाता है, और इस अवसर पर खन्ना पुलिस ने नशे के खिलाफ जागरूकता मुहिम शुरू की। यह अभियान मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों में चलाया गया। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बीजा में खेल प्रतियोगिताओं का उद्घाटन करने पहुंची एसएसपी अश्विनी गोत्याल ने अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने मंच से बच्चों को बताया कि कैसे वे भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई करके आईपीएस बनीं। इसी तरह उनकी बहन ने भी सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर आईपीएस की परीक्षा पास की। एसएसपी का संदेश स्पष्ट था कि जीवन में सफलता पाने के लिए मजबूत इरादे आवश्यक हैं।

जब एसएसपी अश्विनी गोत्याल अपनी टीम के साथ स्कूल के मैदान में पहुंचीं, तो वहां उपस्थित छात्रों ने जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया। उन्होंने बच्चों के साथ संवाद किया और खेल प्रतियोगिताओं का शुभारंभ किया। इस दौरान एसएसपी ने सभी छात्रों को नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया। बच्चों को “पढ़ता पंजाब, सुरक्षित पंजाब” के बैनर तले स्कूल बैग भी वितरित किए गए, ताकि इस संदेश को वे हमेशा अपने मन में रख सकें।

इस कार्यक्रम में छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर एसएसपी का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद, एसएसपी की उपस्थिति में पहले दो स्कूलों के बीच रस्साकशी का मुकाबला हुआ। इस प्रतिस्पर्धा में विजेता टीम का मुकाबला खन्ना पुलिस की टीम से करवाया गया। यह मुकाबला रोमांचक था, जिसमें दोनों टीमों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और एसएसपी ने छात्रों और पुलिस कर्मियों का हौसला बढ़ाया।

इस आयोजन में स्कूल की पंजाबी अध्यापिका अमनदीप कौर ने एक शायराना अंदाज में मंच संचालन किया, जिससे कार्यक्रम में रौनक बरकरार रही। खेल प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन के लिए एसएसपी ने डीएसपी अमृतपाल सिंह भाटी, एसएचओ सदर सुखविंदर पाल सिंह और स्कूल स्टाफ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल छात्रों का मानसिक और शारीरिक विकास होता है, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी फैलता है।

इस तरह का समाजिक प्रयास बच्चों को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने और उन्हें एक सुरक्षित और शिक्षित भविष्य की ओर प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण है। खन्ना पुलिस द्वारा उठाया गया यह कदम वास्तव में प्रशंसनीय है, जो बच्चों को अपने अधिकारों और जीवन की चुनौतियों को समझने में मदद करेगा। उम्मीद की जाती है कि इस प्रकार की मुहिम अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगी और बच्चों में जागरूकता फैलाने में मददगार साबित होगी।