सड़कों की बदहाली पर उग्र लोग: कोटकपूरा नगर कौंसिल का रास्ता अवरुद्ध, पानी का संकट!

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के निर्वाचन क्षेत्र कोटकपूरा में नागरिकों के बीच बुनियादी सेवाओं के लिए खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। मंगलवार को वार्ड नंबर 2, जिसमें आनंद नगर, हीरा सिंह नगर सहित अन्य विकसित क्षेत्रों के निवासी शामिल हैं, ने नगर कौंसिल के कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नगर कौंसिल के मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया और कार्यालय में जाने वाले सभी रास्तों को भी अवरुद्ध कर दिया है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस क्षेत्र की सड़कों की स्थिति अत्यंत खराब है, जिसके चलते अक्सर यातायात की समस्या उत्पन्न होती है। खासकर एक प्रमुख शिक्षण संस्थान के समीप स्थित सड़क में अक्सर स्कूल वैन जाम में फंस जाती हैं, जिससे बच्चों को स्कूल पहुंचने में कठिनाई होती है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र के निवासियों को सीवरेज और पीने के पानी की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मोहल्ला नेता अनंतदीप सिंह रोमा बराड़ ने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार इन समस्याओं के बारे में बताया, लेकिन अधिकारी उनकी परेशानियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

रोमा बराड़ ने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन अवैध कब्जों को हटाने में भी नाकाम रहा है, जबकि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस मामले में आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, सेशन कोर्ट से भी इस संबंध में निर्देश जारी हो चुके हैं। फिर भी नगर प्रशासन की कार्रवाई की कमी से क्षेत्र में अनवांछित कब्जे बढ़ते जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, उनके धरने का जारी रहना तय है।

स्थानीय लोगों ने इस धरने के माध्यम से प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे अपनी समस्याओं को हल करने के लिए गंभीरता से कदम उठाएं। उनकी मांग है कि अधिकारियों को उनके मुद्दों का समाधान करने के लिए सामने आना होगा। धरना स्थलों पर मौजूद कई और लोग भी इस प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी आवाजें बुलंद कर रहे हैं। इस प्रकार, कोटकपूरा का यह हालिया आंदोलन न केवल स्थानीय समुदाय की नाराजगी को दर्शाता है, बल्कि सरकारी संस्थाओं के प्रति बढ़ते विश्वास की कमी को भी उजागर करता है।

इस स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि जब तक नागरिकों की आवाज को सुना नहीं जाएगा और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक स्थानीय जनता की नाराजगी कम नहीं होगी। धरने पर बैठे लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे और किसी सार्थक परिणाम की प्रतीक्षा करेंगे।