मोगा में अकाली दल का बड़ा प्रदर्शन: मंडियों की समस्याओं पर एडीसी को ज्ञापन सौंपा!

पंजाब में मोगा के डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के बाहर शिरोमणि अकाली दल ने एक जोरदार धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के मोगा के इंचार्ज संजीत सिंह गिल और जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज उठाते हुए किसान समुदाय की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को एक मांग पत्र भी सौंपा, जिसमें किसानों के मुद्दों का समाधान करने की अपील की गई।

अमरजीत सिंह ने अपनी बात करते हुए कहा कि वर्तमान में किसान मंडियों में अपनी फसल बेचने के लिए गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं। उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने पंजाब सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह से असफल हो रही है और किसानों की आवाज को अनसुना किया जा रहा है। इसलिए, हमने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरने का निर्णय लिया ताकि सरकार तक हमारी मसलों की जानकारी पहुंच सके।

इस प्रदर्शन में भाग लेने वाले हलका इंचार्ज संजीत सिंह गिल ने भी अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर आरोप लगाया कि उन्होंने किसानों से 126 और 31 धान प्रजातियों की खेती को बढ़ावा दिया, लेकिन अब उनकी फसल खरीद के लिए जो कदम उठाए जा रहे हैं, वह किसानों के हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि फसल के उचित मूल्य का भुगतान न होना किसानों के साथ अन्याय है और इसके प्रति सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

धरने के बाद, अकाली दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एडीसी को अपने मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे का समाधान करेगी। किसानों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने सही नीतियों को लागू करने और फसलों की खरीद के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान त्वरित नहीं किया जाता है, तो वे भविष्य में और भी बड़े प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।

इस तरह, अकाली दल ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि वे किसानों के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और किसी भी हाल में उनकी समस्याओं की अनदेखी नहीं होने देंगे। पार्टी ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि वे अपने संघर्ष को जारी रखेंगे, जब तक कि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता।