पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने हाल ही में पटियाला जिले की 1022 ग्राम पंचायतों के 6276 नवनिर्वाचित पंचों को शपथ दिलाई। यह महत्वपूर्ण समारोह संगरूर रोड पर स्थित न्यू पोलो ग्राउंड के निकट एविएशन क्लब में आयोजित किया गया। इस अवसर पर डॉ. बलबीर सिंह ने पंचों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें राजनीति में प्रतिशोध की भावना से ऊपर उठकर गांवों का विकास करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने पंचों को ग्रामीणों के साथ मिलकर विकास के नए आयाम स्थापित करने का आह्वान किया।
डा. सिंह ने पंचायतों को यह भी बताया कि ग्रामीण झगड़ों का निपटारा यदि गांव में ही किया जाए, तो ऐसी पंचायतों को विशेष सम्मान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गांवों में सेहत समितियों के गठन की औपचारिकता को भी उल्लेख किया और कहा कि प्रत्येक समिति को 10 हजार रुपए की ग्रांट प्रदान की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई पंचायतों को अपनी सोच को बदलकर अपने गांवों को आदर्श गांवों में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया जाए।
स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार द्वारा राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और जन कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह समय है कि अब नई ग्राम पंचायतें भी अपने गांवों का स्तर उठाने के लिए नई सोच के साथ काम करें। डॉ. बलबीर सिंह ने पंचायतों को नशामुक्त गांव मिशन का हिस्सा बनने की अपील की, जिसका उद्देश्य राज्य के युवाओं को नशे के आदी होने से बचाना है।
इस समारोह में उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत पंचायतों से मिलकर काम करने और रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी सुझाव दिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण विकास के लिए मनरेगा का बजट केंद्र सरकार द्वारा परिवर्तित नहीं किया जा सकता। सभी पंचायतों को यह निर्देश दिए गए कि वे ग्रीष्मकालीन ग्राम सभा के माध्यम से विकास की योजना बनाएं और तुरंत कार्य करना शुरू करें।
डॉ. बलबीर सिंह ने गांवों में पर्यावरण की दृष्टि से जागरूकता फैलाई और नानकशाही खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे गांवों का जल और वायु गुणस्तर सुधरेगा और हमें ठोस कूड़ा प्रबंधन के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त और कूड़ा मुक्त वातावरण बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने गांवों में धार्मिक सत्संग के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर भी सत्संग आयोजित करने का सुझाव दिया। इस प्रकार, यह समारोह केवल एक शपथ ग्रहण नहीं था, बल्कि यह पंजाब के गांवों के विकास के लिए एक नई दिशा का संकेत था।