बारिश में अमृतसर के किसानों का धावा: पंजाब बंद के समर्थन को लेकर अपील!

अमृतसर में किसानों की ओर से 30 दिसंबर को आयोजित पंजाब बंद को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारियों का दौर जारी है। इसी सिलसिले में आज किसान संगठनों द्वारा शहर में एक मार्च का आयोजन किया गया। भारी बारिश के बावजूद किसान मानावाला से निकलकर अमृतसर के विभिन्न क्षेत्रों में गए, जहां उन्होंने आम जनता से इस बंद का समर्थन करने की अपील की। किसान संगठनों ने खाली बक्सों को पीटकर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हुए 30 दिसंबर को होने वाले पंजाब बंद के बारे में जानकारी दी।

किसान संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर ने गोल्डन गेट पर gathered crowd के समक्ष अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज किसानों के अधिकारों के लिए पंजाब बंद की मुहिम चलायी जा रही है। इस दौरान अमृतसर की 14 सड़कों पर किसानों का काफिला मौजूद रहा, जिसमें किसान लोगों से समर्थन मांगते नजर आए। पंधेर ने बताया कि छोटे दुकानदार, रेहड़ी-फड़ी वाले और ट्रांसपोर्टर जैसे विभिन्न समूहों से उन्हें इस बंद का समर्थन मिलने के सकारात्मक संकेत मिले हैं।

इसके साथ ही, पंधेर ने राजनीतिक दलों को भी आड़े हाथों लिया और आम आदमी पार्टी, अकाली दल, और कांग्रेस से अनुरोध किया कि वे अपनी स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि ये दल किसानों के साथ खड़े हैं या फिर मोदी सरकार के समर्थन में। उनकी यह चिंता इस बात को दर्शाती है कि किसानों का आक्रोश केवल उनका नहीं बल्कि पूरी जनता का मुद्दा बन चुका है।

सरवन सिंह पंधेर ने आगे बताया कि वर्तमान में किसानों पर सरकार के हमले के साथ-साथ अन्य वर्गों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। बड़े कॉर्पोरेट समूहों द्वारा छोटे व्यवसायों को खत्म किया जा रहा है, जिससे आम दुकानदारों के सामने संकट बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से ऑनलाइन व्यापार के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं, और इसीलिए इस बंद के जरिए सभी वर्गों को अपनी एकजुटता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय है जब सभी को मिलकर सरकार की तानाशाही के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।

आखिर में, आज का आंदोलन सिर्फ किसानों का नहीं, बल्कि सभी मेहनती वर्गों का है जो किसी न किसी रूप में इस प्रणाली की अन्यायपूर्ण नीतियों के शिकार हो रहे हैं। यह पंजाब बंद सिर्फ एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि एक स्वर है जो हर उस व्यक्ति से निकला है जो अपने हक की रक्षा चाहता है। 30 दिसंबर का यह बंद एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह दिखाता है कि जब बात अधिकारों की आती है, तो सभी वर्ग एकजुट होकर खड़े होते हैं।