बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता और टीवी धारावाहिक महाभारत में धृतराष्ट्र का किरदार निभाने वाले गिरिजा शंकर हाल ही में सचखंड गोल्डन टेम्पल में माथा टेकने पहुंचे। गिरिजा यहाँ अपनी दो नई डाक्यूमेंट्री फिल्मों की रिलीज़ के लिए आशीर्वाद लेने के मकसद से आए थे। उन्होंने गुरु घर में अरदास की और कीर्तन का आनंद लिया। गिरिजा ने बताया कि वे काफी समय से गुरु घर नहीं आ पाए थे, इसलिए आज उनकी हाजिरी लगाने की इच्छा हुई।
गिरिजा शंकर ने अपने करियर की बात करते हुए कहा कि उन्होंने टीवी धारावाहिक महाभारत में धृतराष्ट्र का महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बाद उन्होंने कई अंग्रेज़ी और हिंदी फिल्में भी की हैं। उनका मानना है कि कला और संस्कृति की दुनिया में गहरे अनुभवों के लिए हमेशा कुछ नया सीखने को मिलता है। आज जिन डाक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए वे आशीर्वाद लेने आए हैं, वे समझौता करती हैं पंजाब की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को।
आने वाली फिल्म के बारे में जानकारी देते हुए गिरिजा ने बताया कि यह डाक्यूमेंट्री पंजाब और पंजाबी संस्कृति के विविध पहलुओं का उत्कृष्ट वर्णन करती है। वे मानते हैं कि इस फिल्म में पंजाब की ऐसी झलक प्रस्तुत की गई है जो और कहीं देखने को नहीं मिलेगी। गिरिजा ने कहा कि पंजाब एक ऐसा राज्य है जो अपने प्रेम और अपनत्व से भरा हुआ है। यहां की मिट्टी में एक अलग किस्म की आत्मीयता है, जो यहां आने वाले हर व्यक्ति को छू जाती है।
गिरिजा ने यह भी कहा कि पंजाब के लोग हमेशा नई यादों को संजोने और फिर से नई यादें बनाने के लिए तैयार रहते हैं। यह राज्य न केवल खूबसूरत है, बल्कि इसमें सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास की भी गहरी छाप मिलती है। उनकी डाक्यूमेंट्री फिल्में इस विविधता और ऊर्जा को दर्शाने का प्रयास करेंगी। गिरिजा के अनुसार, इस प्रकार की फिल्में न केवल दर्शकों को मनोरंजन करती हैं, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों से भी जोड़ती हैं।
इस बीच, गिरिजा शंकर ने पंजाब के लोगों की मेहमाननवाज़ी की तारीफ की और कहा कि यह राज्य हमेशा उन्हें अपनाता है। उन्होंने अपनी डाक्यूमेंट्री के लिए स्थानीय लोगों से भी सहयोग लिया है, जिससे यह और भी विशेष बन गई है। गिरिजा का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं लोगों को एकत्रित करती हैं और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान करती हैं। उनका यह प्रयास निश्चित रूप से पंजाबी संस्कृति को आगे बढ़ाने में योगदान देगा।