प्रदेश कांग्रेस चंडीगढ़ ने बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 14 दिसंबर को पंजाब राजभवन के समक्ष मार्च और घेराव करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस का मानना है कि इस निर्णय का सीधा असर शहरवासियों पर पड़ेगा, जिससे उनके बिजली के बिलों में कई गुना वृद्धि होने की आशंका है। पार्टी ने इस कदम को आम जनता के साथ अन्याय और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की एक योजना के रूप में देखा है। चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष एचएस लक्की ने कहा कि यह निजीकरण न केवल निवासियों बल्कि बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए भी हानिकारक है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे विरोध प्रदर्शन में उभरकर सरकार को अपनी ताकत का एहसास कराएं।
लक्की ने इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि बिजली विभाग इस समय लाभ में है और बिना किसी भेजे सेवाएं प्रदान कर रहा है। फिर भी इसे एक अनुभवहीन निजी कंपनी को सौंपने की पूरी प्रक्रिया चौंकाने वाली है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस निजीकरण में गंभीर अनियमितताएँ की गई हैं। लक्की ने कहा कि बिना ग्लोबल टेंडर के ऑफलाइन टेंडर मंगाए गए हैं, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि 10 लाख रुपये से अधिक की डील के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अनिवार्य है।
इसके अलावा, मौजूदा कंपनी को टेंडर वापस लेने का विशेष अवसर दिया गया, जिससे अन्य दावेदारों के साथ भेदभाव हुआ। उन्होंने यह भी सूचित किया कि बिजली विभाग की सभी संपत्तियां केवल 1 रुपये की मामूली राशि में निजी कंपनी को हस्तांतरित की जा रही हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह निर्णय एक गुप्त साजिश का परिणाम है। इससे निवासियों के सामने आर्थिक बोझ बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
चंडीगढ़ कांग्रेस का कहना है कि यदि यह निजीकरण लागू होता है, तो शहर में बिजली दरें अवश्य बढ़ेंगी। वर्तमान में घरेलू उपभोक्ता, जो 300 यूनिट तक बिजली का उपयोग करते हैं, उन्हें 2.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है। यह दर निजीकरण के बाद कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे शहर के निवासियों के लिए जीवन यापन महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई है और यूटी पावरमैन यूनियन का समर्थन किया है। लक्की ने चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से अपील की है कि वे इस निजीकरण सौदे को रद्द करें, ताकि जनता के लिए एक सच्ची सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कांग्रेस ने 14 दिसंबर को राजभवन का घेराव करने का ऐलान करते हुए सभी राजनीति दलों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, नगर पार्षदों, उद्योगपतियों, दुकानदारों और अन्य हितधारकों से इस प्रदर्शनी में शामिल होने का निवेदन किया है। इससे साफ है कि कांग्रेस बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है और इस मुद्दे पर नगरवासियों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।