चंडीगढ़ के सेक्टर 34 में आयोजित दिलजीत दोसांझ के लाइव शो ने हजारों लोगों को आकर्षित किया। कार्यक्रम के दौरान, जहां कुछ लोग मंच के समीप बैठकर शो का आनंद ले रहे थे, वहीं सैकड़ों दर्शक मार्केट क्षेत्र में खड़े होकर इसे देखने में जुटे रहे। इस दौरान कुछ लोगों ने मार्केट में स्थित दुकानों से शराब खरीदकर खुलेआम सेवन किया, जबकि पुलिस के जवान इस पूरे माहौल में मूकदर्शक बने रहे। कार्यक्रम के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी हर तरफ मौजूद थे, फिर भी किसी ने भी उन्हें शराब पीने से नहीं रोका, जो कि खुले में शराब पीने पर कानूनी अपराध है। पुलिस का ध्यान सिर्फ दिलजीत के शो पर था, जबकि आसपास नियमों का उल्लंघन हो रहा था।
लाइव शो के दौरान आतिशबाजी का भी प्रबंध किया गया, जो न केवल दर्शकों के लिए एक आकर्षण था, बल्कि यह बेहद खतरनाक भी साबित हो सकता था क्योंकि शो के ठीक पीछे एक पेट्रोल पंप मौजूद था। इससे घटना के होने की आशंका बढ़ गई थी, हालांकि शो के सुरक्षा इंतजामों को ध्यान में रखते हुए, वहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी तैनात थे। कार्यक्रम से जुड़ी भीड़ के चलते शो खत्म होने के बाद परिवहन व्यवस्था में भी खासी दिक्कत हुई। दिलजीत दोसांझ का शो रात 10 बजे खत्म हुआ, जिसके बाद इलाके में हल्का जाम लग गया। हालांकि,Traffic Police की मौजूदगी के कारण लोगों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा।
इस शो में दर्शकों के सुरक्षा संबंधी कदमों को लेकर भी सवाल उठे हैं। कई दर्शक पेड़ और खंभों पर चढ़कर शो देखने की कोशिश में थे। बाउंसर और पुलिस की उपस्थिति के बावजूद, कई लोग बिना टिकट अभूतपूर्व ढंग से एंट्री करने का प्रयास कर रहे थे। एक बाउंसर जिसे पुलिस ने हिरासत में लिया, आरोप लगाया गया था कि वह लोगों से सेटिंग कर एंट्री दे रहा था। जांच के दौरान, पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता को यह महसूस हुआ कि बिना माननीय तरीके से एंट्री हासिल कर रहा है।
इस दौरान प्रशासन द्वारा शो के आयोजन पर कई सवाल उठाए गए। वरिष्ठ नागरिक राम कुमार गर्ग ने प्रशासन से पूछा कि इस शो के आयोजन में खर्च और राजस्व का क्या प्रबंधन किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या शो में शोर के लिए उचित अनुमति ली गई थी और क्या ध्वनि की मॉनिटरिंग की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि पिछली घटनाओं की रोशनी में, प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं जैसे कि करण औजला के शो के दौरान भीड़ के पेट्रोल पंप पर घुसने की घटना। सुरक्षा कारणों से आतिशबाजी पर रोक लगाने की पुलिस की प्रतिबद्धता की भी चर्चा हुई है।
इन सभी घटनाक्रमों के मध्य, यह स्पष्ट है कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को आयोजन को लेकर सतर्क रहना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। इस कार्यक्रम ने न केवल स्थानीय निवासियों का ध्यान खींचा, बल्कि सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाने का भी कारण बनी।