चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण मामले में बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बीएमडब्ल्यू कार के बीमा क्लेम से संबंधित आदेश जारी किया है। आयोग ने कंपनी को 40 लाख 13 हजार 236 रुपये की क्लेम राशि और 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही, कंपनी को 40 हजार रुपये का जुर्माना देने का भी आदेश दिया गया है। आयोग का स्पष्ट बयान था कि बीमा कंपनियों को दावे की प्रामाणिकता के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगने का अधिकार है, लेकिन उन्हें उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से निराश नहीं करना चाहिए।
इस मामले की शुरुआत चंडीगढ़ के सेक्टर-15ए निवासी नवजीवन जीत सिंह की शिकायत से हुई। उन्होंने बीमा कंपनी के जनरल मैनेजर और शाखा प्रबंधक के खिलाफ लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाया। नवजीवन ने अपनी बीएमडब्ल्यू कार का बीमा 13 जनवरी 2024 से 12 जनवरी 2027 तक कराया था। दुर्भाग्यवश, उनकी कार का एक्सीडेंट 30 जनवरी 2024 को हुआ, जब कार को उनके रिश्तेदार इकराम सिंह भट्टल चला रहे थे।
गौरतलब है कि एक्सीडेंट के पश्चात पुलिस ने इसे साधारण सड़क दुर्घटना मानते हुए कोई मामला दर्ज नहीं किया। दोनों पक्षों ने पंचकूला सेक्टर-21 थाने में आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया। इसके बावजूद, जब नवजीवन ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, तो बीमा कंपनी ने 49 लाख 58 हजार 118 रुपये का अनुमानित मरम्मत खर्च देखते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि चालक ने पुलिस रिपोर्ट के साथ मेडिकल जांच कराने से मना कर दिया था।
शिकायतकर्ता ने यह स्पष्ट किया कि दुर्घटना के बाद पुलिस की मौजूदगी में समझौता हो गया था और इसलिए मेडिकल लीगल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। बार-बार एमएलसी रिपोर्ट मांगने के बावजूद, बीमा कंपनी क्लेम निपटाने में आनाकानी करती रही। पुलिस ने 28 मार्च को एक प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें कहा गया था कि समझौते के कारण कोई मामला दर्ज नहीं हुआ और न ही एमएलसी रिपोर्ट उपलब्ध है। हालांकि, बीमा कंपनी ने इस प्रमाण पत्र को स्वीकारने से इंकार कर दिया।
आखिरकार, नवजीवन ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बीमा कंपनी को क्लेम की राशि और ब्याज देने का आदेश सुनाया। इस निर्णय ने एक बार फिर से यह स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों का कर्तव्य केवल दस्तावेज मांगना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भी है। आयोग ने इस प्रकरण को महत्वपूर्ण माना और सभी बीमा कंपनियों को एक चेतावनी दी कि उन्हें उपभोक्ताओं के साथ संतोषजनक व्यवहार करना चाहिए।