चंडीगढ़ शहर में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर आई एक नई रिपोर्ट ने चिंताजनक हालात की ओर इशारा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ के सेक्टर-53 और मोहाली के सेक्टर-68 को सबसे अधिक प्रदूषित हॉटस्पॉट के रूप में पहचाना गया है। इन स्थानों पर पीएम 2.5 के स्तर सुरक्षित मानकों से काफी अधिक पाए गए हैं, जो कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है। यह रिपोर्ट “डिकोडिंग अर्बन एयर: हाइपरलोकल इनसाइट्स इनटू पीएम 2.5 पॉल्यूशन एक्रॉस इंडियन मेट्रोपोलिसेस” शीर्षक से रेस्पायरर लिविंग साइंसेज द्वारा प्रकाशित की गई है, और इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.) के डेटा के साथ-साथ हाइपरलोकल निगरानी और गूगल मैप्स एयर क्वालिटी एपीआई का उपयोग किया गया है।
रिपोर्ट में प्रदूषण के मुख्य कारणों के रूप में शहर में बढ़ती वाहन संख्या, शहरीकरण और हरित क्षेत्रों की कमी को बताया गया है। सी.पी.सी.बी. के नवंबर 2024 के आंकड़ों के अनुसार, औसत पीएम 2.5 स्तर 129 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है। हालाँकि, हाइपरलोकल मॉनिटरिंग ने दिखाया है कि कुछ क्षेत्रों में ये स्तर इससे भी अधिक खतरनाक हैं। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की तीव्रता बढ़ गई है।
रिपोर्ट में उल्लेखित डेटा ने विभिन्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की बारीकियों को उजागर किया है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के चेयरमैन प्रोफेसर सच्चिदा नंद त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि हाइपरलोकल वायु गुणवत्ता निगरानी पारंपरिक निगरानी प्रणालियों के मुकाबले अधिक प्रभावी साबित हो रही है। यह स्थानीय प्रदूषण की वास्तविकता और व्यापक आकलनों के बीच की दूरी को पाटने में मदद करती है। इससे न सिर्फ शहर की वायु गुणवत्ता को बेहतर समझने में मदद मिलेगी, बल्कि प्रभावी समाधानों के विकास में भी सहायता मिलेगी।
इस रिपोर्ट ने चंडीगढ़ जैसे शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की गंभीरता को उजागर करते हुए एक गंभीर संदेश दिया है। यह समय की मांग है कि संबंधित अधिकारियों और नीति निर्माताओं को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए और नागरिकों को भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। लोगों में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की चेतना जागृत होना crucial है। इस प्रकार, यह जरूरी है कि सभी मिलकर प्रदूषण की समस्या का सामना करें और एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण की दिशा में बढ़ें।