आम आदमी पार्टी के पार्षद पद के उम्मीदवार अमित ढल्ल के खिलाफ कांग्रेस ने एक गंभीर शिकायत रिटर्निंग अधिकारी को प्रस्तुत की है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि अमित ढल्ल द्वारा चुनाव अधिकारियों को प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में महत्वपूर्ण कमी है। विशेष रूप से, शिकायत में यह कहा गया है कि ढल्ल ने अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि से संबंधित एफआईआर और कोर्ट के आदेश छिपाए हैं, जो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है। इस शिकायत के बाद, जालंधर नॉर्थ क्षेत्र से विधायक बावा हैनरी ने स्पष्ट किया है कि यदि कल तक चुनाव अधिकारी इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं करते, तो वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का सहारा लेने के लिए मजबूर होंगे।
विधायक बावा हैनरी ने कहा कि उन्हें आज दो बजे शिकायत का आधिकारिक जवाब प्राप्त हुआ है। इस उत्तर को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने निर्णय लिया है कि वे चुनाव अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर को इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए एक नई शिकायत प्रस्तुत करेंगे। यदि उनकी सुनवाई नहीं होती है, तो वे न्याय के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेंगे। इस प्रक्रिया की गंभीरता को देखते हुए, वे संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करेंगे, जो इस मामले में सहायक हो सकते हैं।
इस मुद्दे की जड़ में कांग्रेस के नेता सतीश धीर की ओर से की गई शिकायत है। धीर, जो नॉर्थ हलके के वार्ड-24 से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, ने रिटर्निंग अधिकारी गुरप्रीत सिंह को शुक्रवार को शिकायत दी। उन्होंने अमित ढल्ल के नामांकन पत्र को रद्द करने का अनुरोध किया, यह बताते हुए कि ढल्ल विभिन्न धाराओं के तहत पहले ही दोषी ठहराए जा चुके हैं। धीर ने उल्लेख किया कि आईपीसी की धारा 353, 186, 160, और 148 के तहत ढल्ल को सजा मिली है और इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने संबंधित एफआईआर (नं. 130) का भी हवाला दिया, जो 27 सितंबर 2009 की है।
सतीश धीर ने यह भी बताया कि चुनावी प्रक्रिया में व्यावहारिकता के लिए बेहद आवश्यक है कि आवाज़ उन उम्मीदवारों की सुनी जाए, जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव आयोग को नियमों के अनुसार धारा 8, रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1951 के अनुसार ढल्ल के नामांकन को रद्द करने पर विचार करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी बताया कि ढल्ल को धारा 353 के तहत दो साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इस संपूर्ण मामले में, कांग्रेस पार्टी ने कड़ी सक्रियता दिखाई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए गंभीर हैं। यदि चुनाव अधिकारी इस शिकायत पर यथाशीघ्र उचित कदम नहीं उठाते हैं, तो यह स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी हाईकोर्ट के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।