अमृतसर निगम चुनाव: BJP के 64 नए दांव, कांग्रेस-अकाली-आप में कांटे की टक्कर!

अमृतसर नगर निगम चुनाव नजदीक हैं और इस बार कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनावी मैदान में नए चेहरों की भरपूर संख्या उतारी है। आम आदमी पार्टी, जो हाल ही में सत्ता में आई है, के लिए यह पहले नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं। इसी बीच 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों की तरह ही इस बार भी अधिकांश उम्मीदवार नए होंगे। आम आदमी पार्टी पहले भी नगर निगम चुनाव लड़ चुकी है, लेकिन इस बार उनके पास चुनावी लड़ाई में अपने उम्मीदवार हैं। जब से करमजीत सिंह रिंटू ने आम आदमी पार्टी जॉइन की है, तब से पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा के कुछ विधायकों को भी अपने साथ लिया है, जिससे वहां के राजनीतिक परिवेश में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है।

चुनावी परिदृश्य पर गौर करें तो यह स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने सभी 85 वार्डों में अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। भाजपा ने 64, यानी 75 फीसदी नए उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने 51, यानी लगभग 60 फीसदी नए चेहरों को मैदान में उतारा है। हालांकि, कांग्रेस की राजनीति में परिवारवाद का प्रभाव अभी भी देखने को मिल रहा है। पूर्व विधायकों ने अपने अपने रिश्तेदारों को उम्मीदवार बनाया है, जैसे कि सुनील दत्ती के भाई समीर दत्ता और भाभी ममता दत्ता को वार्ड 62 और 61 से टिकट दिए गए हैं। इसके अलावा, पूर्व विपक्षी नेता राज कंवलप्रीत सिंह लकी खुद वार्ड 14 से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उनकी बेटी डॉ. शोभित कौर भी वार्ड 9 से चुनाव में भाग ले रही हैं।

भाजपा की रणनीति इस बार नए चेहरों को आगे लाना है, जिसमें वह अपने पुराने चेहरों से दूरी बनाते हुए नई पंक्ति तैयार कर रही है। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता जैसे अनुज सिक्का, अमन ऐरी, संजय खन्ना और प्रीति तनेजा इस बार चुनावी दौड़ से दूर हैं। यह स्थिति भाजपा के लिए एक अवसर पैदा करती है, जिससे वह अपने पुराने कैडर वोट को फिर से सक्रिय करने और उनकी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है। भाजपा की रणनीति स्पष्ट रूप से इस बात पर केंद्रित है कि नया नेतृत्व जनाधार को मजबूत कर सके और आगामी चुनावों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सके।

अमृतसर नगर निगम चुनाव में आए नए बदलाव और उम्मीदवारों की तादाद यह संकेत देती है कि राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला और भी कड़ा होगा। वहीं, आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव उनके गठन के बाद पहली बार महत्वपूर्ण साबित होगा, जबकि भाजपा और कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक को बनाए रखने और नया वोटर वर्ग जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इन सभी चुनावी गतिविधियों से यह साफ है कि आने वाले समय में अमृतसर के राजनीतिक परिदृश्य में कई परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।