सुखबीर गोलीकांड पर AAP घिरी: मंत्री बिट्टू बोले- आतंकी भरोसेमंद नहीं; मान ने बताया साजिश

पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर बुधवार को अमृतसर स्थित गोल्डन टेम्पल के गेट पर गोली चलाई गई। हालाँकि गोली दीवार पर लगने के कारण वह बाल-बाल बच गए। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और विपक्ष ने पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद से कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि जेलों से गैंगस्टर राज कर रहे हैं और यह सुरक्षा में गंभीर चूक का संकेत है। सिरसा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने राज्य को विनाश की ओर बढ़ा दिया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने भी इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह श्री दरबार साहिब पर हमला है। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल एक सेवादार की भूमिका निभाते हुए अपनी सेवा दे रहे थे, और उन पर हमला करना सिख मर्यादा के खिलाफ है। सांपला ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा इंतज़ामों में भारी लापरवाही बरती गई है और सरकार को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कांग्रेस के नेता प्रताप बाजवा ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सभी राजनीतिक नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में इस तरह की हिंसक घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

पंजाब सरकार ने भी इस हमले की निंदा की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की, जिसने हमलावर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने एक बड़ी वारदात को होने से रोका और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने कहा कि आतंकवादी किसी भी सूरत में किसी के सगे नहीं हो सकते। उन्होंने इस बात की सराहना की कि पंजाब पुलिस ने हमलावर को पकड़ लिया।

भाजपा के नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि इस तरह की कायरता से भरी हरकतें किसी भी समुदाय की पहचान से जुड़ी नहीं हैं। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें दंडित किया जाएगा। विपक्षी नेताओं ने इस हमले को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ आवाज़ उठानी शुरू कर दी है और उनसे तत्काल सांठ-गांठ की जांच करने की मांग कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि पंजाब में राजनीतिक स्थिति कितनी तनावपूर्ण हो गई है, विशेष रूप से जब से आम आदमी पार्टी की सरकार आई है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे राज्य का माहौल और भी अधिक संवेदनशील हो गया है। सभी दल एकजुट होकर शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की कोशिश में लगे हुए हैं। सभी राजनीतिक पार्टियां इस बात पर सहमति रखती हैं कि पंजाब की शांति बहाल रहनी चाहिए और इस तरह की हिंसक घटनाएं अस्वीकार्य हैं।