पंजाबी गायक करण औजला के शो पर विवाद: नशा बढ़ावा देने के आरोप!

चंडीगढ़ में पंजाबी गायक करण औजला के 7 दिसंबर को होने वाले शो को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में प्रोफेसर पंडित राव धरनेवर ने पुलिस को एक ऑनलाइन शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने करण औजला के गानों में शराब, ड्रग्स और हिंसा के बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। प्रोफेसर ने विशेष रूप से मांग की है कि शो के दौरान करण औजला कुछ गाने जैसे “चिट्टा कुर्ता”, “अधिया”, “फ्यू डेज”, “अल्कोहल 2”, “गैंगस्टा” और “बंदूक” नहीं गाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि करण इन गानों का प्रदर्शन करते हैं, तो वह चंडीगढ़ के SSP और DGP के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दर्ज करेंगे।

करण औजला का शो “इट बाज ऑल ए ड्रीम” 7 दिसंबर को शाम 6 बजे शुरू होगा और यह करीब चार घंटे तक चलेगा। प्रोफेसर धरनेवर ने इस शो को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है, उनका कहना है कि युवाओं पर ऐसे गानों का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे समाज में हिंसा और नशे को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने यह भी मांग की कि करण औजला को अपने गानों को यू-ट्यूब से हटाने के लिए बुलाया जाए, और इस संदर्भ में पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों का हवाला दिया है।

इससे पहले, पंडित राव धरनेवर ने 15 नवंबर को हैदराबाद में पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के खिलाफ भी इसी तरह की शिकायत की थी। इसके परिणामस्वरूप, तेलंगाना सरकार ने दिलजीत और उनकी टीम के खिलाफ नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें यह निर्देश दिया गया था कि वे लाइव शो के दौरान कुछ विशेष गाने जैसे “पटियाला पग” और “पंज तारा” नहीं गाएं। यह नोटिस महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा जारी किया गया था, और इसका मकसद युवाओं और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना था।

इस बीच, करण औजला की हालिया घटनाओं में उनके यूके टूर के दौरान एक और घटना भी शामिल है, जब लंदन में उनके कॉन्सर्ट के दौरान किसी ने उन पर जूता फेंका। इस घटना से गुस्साए करण ने मंच पर ही गाली-गलौज करना शुरू कर दिया और जूता फेंकने वाले को स्टेज पर आने की चुनौती दी। उन्होंने अंत में युवाओं से अपील की कि वे ऐसा न करें और एक-दूसरे का सम्मान करें।

यह मामला समाज में संगीत और उसकी भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। पंडित राव धरनेवर जैसे व्यक्तियों की ओर से उठाए गए सवाल हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हमें अपने कलाकारों से अपेक्षाएँ और जिम्मेदारियाँ नहीं रखनी चाहिए? यह गहन चर्चा का विषय रहेगा कि कैसे कला और मनोरंजन के माध्यम से हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।