अबोहर में रहस्यमयी मौत: युवक की नशीली गोली से हुई अंत, 3 साल से लावारिस!

अबोहर के सरकारी अस्पताल में एक युवक की हालात बिगड़ने के बाद हुई मृत्यु ने मानवता को एक बार फिर झकझोर दिया है। युवक की उम्र करीब 35 वर्ष थी और वह पिछले तीन वर्षों से अस्पताल में रह रहा था। उसकी बिगड़ती स्थिति का मुख्य कारण नशे का सेवन था। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था, लेकिन इस दौरान उसके परिवार का कोई भी सदस्य उसे देखने नहीं आया। पुलिस ने बताया कि मृतक का शव मोर्चरी में रखा गया है ताकि इसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

सूत्रों के अनुसार, युवक का नाम आशीष था और वह सेवा भारती द्वारा वितरित किए जाने वाले लंगर के सहारे जीवन यापन कर रहा था। अस्पताल के स्टाफ ने जानकारी दी है कि आशीष की बहन और अन्य परिवार के सदस्य भी उसी शहर में रहते हैं, लेकिन उसकी नशे की लत के कारण उन्हें उसकी परवाह नहीं थी। कुछ सप्ताह पहले आशीष ने अत्यधिक मात्रा में नशीली गोलियां खा ली थीं, जिसके परिणामस्वरूप उसे पैरालाइसिस का सामना करना पड़ा। उसके डॉक्टरों ने उसे आगे इलाज के लिए रेफर किया, लेकिन कोई भी परिवार का सदस्य उसे अस्पताल से ले जाने के लिए आगे नहीं आया।

इस संकट में, जब कोई भी संस्थान उसकी मदद के लिए तैयार नहीं हुआ, तो अस्पताल के डॉक्टरों ने खुद पहल की। उन्होंने उसे एक निजी कमरे में शिफ्ट कर उसकी देखभाल करने का निर्णय लिया। डॉक्टर महेश ने कहा कि आशीष नशे का आदी था और हालात की गंभीरता देखते हुए ही उसकी जिंदगी बचाने के लिए प्रयास किए गए। लेकिन इस नशे की आदत ने न केवल उसे आधिकारिक रूप से लावारिस स्थिति में पहुंचाया, बल्कि उसके लिए सहायता के सभी दरवाजे भी बंद कर दिए।

राजू चराया, जो नर सेवा नारायण सेवा समिति के सदस्य हैं, ने इस पूरे मामले पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने कई आश्रमों से संपर्क किया था ताकि आशीष को वहां रखा जा सके। लेकिन उसके नशेड़ी होने के कारण किसी ने भी उसे आश्रय देने से इंकार कर दिया। यह घटना समाज के लिए एक गंभीर संदेश है कि नशे की लत न केवल व्यक्ति की जिंदगी को प्रभावित करती है, बल्कि उसके परिवार और समाज की जिम्मेदारी को भी बाधित करती है।

इस घटना ने एक बढ़ती हुई समस्या को उजागर किया है, जिसमें नशे की लत के शिकार लोगों को आवश्यक सहायता और समर्थन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे मामलों में जागरूकता और सक्रियता की आवश्यकता है ताकि इस तरह का दुखद स्थिति भविष्य में दोबारा न देखने को मिले। समाज के विभिन्न अंगों को चाहिए कि वे ऐसे समस्याओं के प्रति सजग रहें और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहें।