अमृतसर में CM मान का ऐलान: GNDU में कवि सुरजीत पातर के नाम पर केंद्र बनेगा!

पंजाब की ऐतिहासिक नगरी अमृतसर के जीएनडीयू विश्वविद्यालय में दिवंगत कवि सुरजीत सिंह पातर की याद में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान ने शिरकत की। इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कुलदीप धालीवाल सहित कई प्रमुख नेता और अधिकारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मान ने सुरजीत पातर के परिवार से भी मुलाकात की और उनके साथ बिताए अद्वितीय पलों को साझा किया। कार्यक्रम के दौरान, सुरक्षा कारणों से पुलिस प्रशासन भी तत्पर रहा, ताकि इस महत्वपूर्ण आयोजन में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पातर साहिब की अद्वितीय कविता शैली की प्रशंसा की और उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सुरजीत पातर ने कविता को एक नया आयाम दिया है और वे स्वयं उनके प्रोत्साहन से प्रेरित होते थे। मान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पातर साहिब के साथ उनके संपर्कों को वे कभी नहीं भूल सकते। 1993 में कला के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत करते समय पातर साहिब से मिलने का उनका अनुभव बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने कॉलेज के दिनों में पातर की कविताओं का अध्ययन किया और उन कविताओं ने उन्हें प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अमृतसर की जीएनडीयू विश्वविद्यालय में सुरजीत पातर के नाम पर “सुरजीत पातर एथिकल एआई सेंटर” की स्थापना की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के चांसलर से अनुरोध किया कि वे आवश्यक रूपरेखा तैयार करें ताकि जल्द से जल्द इस केंद्र का निर्माण किया जा सके। इस केंद्र में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को उच्चतम स्तर की शिक्षा मिल सके। मान ने इस बात पर बल दिया कि यह उनकी सरकार का कर्तव्य है कि वे पातर साहिब के योगदान को सम्मानित करें।

आगे बढ़ते हुए, मुख्यमंत्री मान ने यह भी बताया कि भविष्य में सुरजीत पातर की याद में एक विशेष अवॉर्ड की भी स्थापना की जाएगी, जिसे नए शायरों को प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार उनकी कला और साहित्य में योगदान को मान्यता देगा। पातर साहिब का नाम हमेशा पंजाबी भाषा और साहित्य में अमर रहेगा, और यह पुरस्कार नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।

इस प्रकार, इस कार्यक्रम ने न केवल कवि सुरजीत सिंह पातर को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि उनके योगदान को याद करने और उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री मान की यह पहल निश्चित रूप से पंजाब के सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार करेगी।