बठिंडा में पीआरटीसी और पनबस के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इन कर्मचारियों ने तीन दिनों के लिए सरकारी बस सेवा को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया है। पहले दिन से ही बठिंडा डिपो के तहत काम करने वाले 174 रूटों पर बसों का संचालन पूरी तरह ठप रहा। यह हड़ताल तब शुरू हुई जब अनुबंधित कर्मचारियों ने दो दिन पहले अपनी समस्याओं को लेकर चेतावनी दी थी, जिसके बाद पंजाब के परिवहन मंत्री लालजीत भुल्लर ने उनसे बातचीत की। हालांकि, उनकी सुनवाई में सरकार ने उनकी मांगों को अनुचित करार दिया, जिससे कर्मचारी वर्ग में निराशा फैल गई।
सरकारी परिवहन सेवाओं की हड़ताल के कारण, रोजाना लगभग 2000 से 2500 रूट प्रभावित हो रहे हैं। संदीप सिंह ग्रेवाल और सरबजीत, जो राज्य कमेटी के सदस्य हैं, ने कहा कि कई सालों से वे अपनी उचित मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अनदेखी के चलते अब वे अपनी आवाज उठाने पर मजबूर हैं। उनका कहना है कि इस हड़ताल से राज्य को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है, और इससे आम जनता को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस हड़ताल के दौरान, कर्मचारियों ने आम जनता से माफी भी मांगी है, क्योंकि उनकी समस्याओं के कारण जनजीवन में असुविधा बढ़ गई है। वे यह भी कह रहे हैं कि सरकार ने उन्हें धोखा दिया है, और इस तरह के व्यवहार के खिलाफ वे मजबूती से खड़े हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें उचित हैं और सरकार को उनकी बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका मुख्य उद्देश्य न केवल अपनी समस्याओं का समाधान निकालना है, बल्कि वे जनता का समर्थन भी चाहते हैं।
हड़ताल के पहले दिन की स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि पीआरटीसी और पनबस के कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज करना अब कठिन हो गया है। बठिंडा में आम लोगों को बस सेवा का अभाव महसूस हो रहा है, और उन्हें alternatives का सहारा लेना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में इस हड़ताल और अधिकारियों के बीच वार्ता का क्या परिणाम होता है, यह देखने की बात होगी। यदि सरकार अपने कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो बस सेवा में और भी अधिक बाधा आने की संभावना है। यह कहा जा सकता है कि यह संघर्ष सिर्फ कर्मचारियों का नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का भी बनता जा रहा है, जो पंजाब की परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।