चंडीगढ़ में एडवाइजर पद समाप्ति पर बवाल: AAP और SAD का आरोप, पंजाब के हक पर डाका!

केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में 40 वर्षों के बाद प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत “प्रशासन सलाहकार” का पद समाप्त कर दिया गया है और उसके स्थान पर “मुख्य सचिव” का पद सृजित किया गया है। इसके साथ ही चंडीगढ़ में आईएएस अधिकारियों के पद भी बढ़ाए गए हैं, जिससे अब कुल अधिकारियों की संख्या 11 हो गई है। यह निर्णय हालांकि चर्चा का विषय बन गया है और पंजाब में राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) और शिरोमणि अकाली दल ने इस परिवर्तन पर अपनी आपत्ति व्यक्त की है।

इन राजनीतिक दलों का कहना है कि इस निर्णय से पंजाब के अधिकारों पर गंभीर दबाव डाला गया है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा है कि यह कदम चंडीगढ़ पर पंजाब के उचित दावे को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस तरह के भेदभावपूर्ण निर्णय न ले, जो पंजाब के हितों को नुकसान पहुँचा सकता है। उनका कहना था कि चंडीगढ़ का सही अधिकार पंजाब का है और यहाँ के प्रशासन में इस तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।

AAP के नेता नील गर्ग ने भी इस बदलाव की आलोचना की है, यह कहते हुए कि चंडीगढ़ का प्रशासनिक ढांचा बदलना और पंजाब के अधिकारों को कमजोर करना एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि चंडीगढ़ में किसी भी तरह के बदलाव से पहले पंजाब सरकार से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए। यह राजनीतिक दबाव यह भी दर्शाता है कि वर्तमान बदलाव का राज्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है और इससे पंजाब की हितों की रक्षा करने में कठिनाई हो सकती है।

कई राजनीतिक और सामाजिक नेता इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि चंडीगढ़ भारत की संसद द्वारा पंजाब के अधीन मान्यता प्राप्त है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ को एक अलग यूटी बनाने की मंशा से यह परिवर्तन किया है, जो कि सम्पूर्ण पंजाब के लिए चिंता का विषय है। यह भी कहा गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस परिवर्तन के बारे में जनता से साझा नहीं करने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

आगे चलकर, प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और ढांचे में परिवर्तन से यह स्पष्ट है कि चंडीगढ़ का प्रशासनिक नियंत्रण केंद्र के हाथ में रहने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया मुख्य सचिव, अन्य राज्यों के मुख्य सचिव के समान होगा, जबकि चंडीगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियों की संख्या बढ़ने से कई तरह के नियंत्रण और शक्ति को संतुलित करने में सहायता मिलेगी। कुल मिलाकर, यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी एक बड़े प्रभाव का संकेत है, जिसे आगे चलकर देखा जाएगा।