## बैतूल: गोबर से बने 200 से ज्यादा उत्पाद, सस्ती आजीविका का स्रोत
रोजमर्रा के जीवन में प्लास्टिक और सीमेंट का अत्यधिक उपयोग एक बढ़ती चिंता का विषय बन रहा है। लेकिन अब बैतूल ऐसा हल प्रदान कर रहा है जो न सिर्फ़ असरदार है, बल्कि सस्ती और सस्टेनेबल भी है।
यहां गोबर को इस्तेमाल करके 200 से भी ज्यादा ऐसे उत्पाद बनाये जा रहे हैं जो दैनिक जीवन में उपयोगी हैं। महिलाएं अपने घरों को सुशोभित करने, समृद्धि लाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए ये उत्पाद बना रही हैं। इन उत्पादों में मोबाइल स्टैंड, घरेलू सामान, मूर्तियां, गमले और सजावटी सामान शामिल है, जो पहले प्लास्टिक या सीमेंट से बनते थे।
देवी अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी समारोह समिति के द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से गौ उत्पाद प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर में हर दिन सैकड़ों महिलाएं भाग ले रही हैं, जो स्वानंद गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र के प्रशिक्षकों से गोबर से उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। जहाँ फिलहाल 80 तरह के उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
संस्था की संचालक डॉ. भाग्यश्री भकने ने बताया कि उनकी संस्था 15 सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। उनका लक्ष्य प्लास्टिक और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनने वाले उत्पादों से होने वाले प्रदूषण को रोकना है और एक सस्टेनेबल विकल्प देना है।
“हमने पाया कि देशी गौ माता के गोबर से हम वही हर चीज बना सकते हैं जो प्लास्टिक से बनती है। इसके लिए हमने छोटे-छोटे सांचों का निर्माण किया, जिससे गौ पालक, महिलाएं और युवा बहुत कम लागत में उत्पाद बना सकते हैं, जिससे वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं。”
**गोबर से उत्पाद**
प्रशिक्षक उत्तम गायकवाड़ बताते हैं कि गोबर से उत्पाद बनाना आसान है।
“आमतौर पर हम गोबर को वैसे ही फेंक देते हैं, लेकिन इन उत्पादों को बनाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला गोबर चुने जाते हैं। ”
इस गोबर को सुखाकर, उसे मिक्सी में बारीक पीसकर, एकत्रित किया जाता है। इसके बाद उसमें इमली के बीज का पाउडर और गोंद मिलाकर एक लुगदी बनाई जाती है।
इस लुगदी को विभिन्न प्रकार के सांचों में ढालकर विभिन्न प्रकार के सजावटी सामान बनाए जाते हैं।
**एक सफल व्यवसाय**
जीसीसीआई के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक जितेंद्र भकने बताते हैं कि वे पिछले आठ सालों से इस संस्था में इस प्रशिक्षण का आयोजन कर रहे हैं।
“जहा कई युवाओं ने इस परियोजना को अपनाकर धंधा भी शुरू किया है।”
**महिलाओं के लिए एक नई संभावना**
बहुत से महिलाएं इस प्रशिक्षण से उत्साहित हैं।
पूनम सोनपुरे कहती हैं, “इससे पहले कभी नहीं सोचा था कि गोबर से इतने उत्पाद बने जा सकते हैं। ”
“इस प्रशिक्षण से हमारी जिन्दगी बदल सकती है और हम आत्मनिर्भर बन सकेंगी.
* गोबर से बने प्रोजेक्ट
* दरवाजों पर लगाने वाले सजावटी आइटम
* धार्मिक आस्था से जुड़ा सजावट
* ओम, स्वस्तिक, और शुभ लाभ की आकृतियां
* भगवान की मूर्तियां
* कैंडल स्टैंड
* मोबाइल स्टैंड
* दीपक
* गमले
* विभिन्न प्रकार के सजावटी आइटम