फरीदकोट में किसान आंदोलन: कृषि नीति की प्रतियां फूंकी, सरकार पर कॉर्पोरेट समर्थन का आरोप!

फरीदकोट के कोटकपूरा में संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में किसानों ने केंद्र सरकार की कृषि मंडीकरण नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने तहसील कॉम्प्लेक्स के निकट नीति की प्रतियां जलाकर अपने विरोध का इजहार किया। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार कृषि मंडीकरण नीति के माध्यम से दरअसल वही पुराने कृषि कानून और नीतियाँ लागू करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें किसानों के व्यापक दबाव के बाद वापस लेना पड़ा था।

प्रदर्शन से पहले, किसानों ने कोटकपूरा में मुख्य चौक से तहसील कॉम्प्लेक्स की ओर एक रोष मार्च निकाला, जिसमें शामिल किसानों ने सरकारी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। एसडीएम कार्यालय के सामने भी किसानों ने प्रदर्शन किया, यह दर्शाते हुए कि वे अपनी आवाज को ऊंचा करने के लिए तैयार हैं। किसान नेता सुखमंदर सिंह ढिलवां और जसप्रीत सिंह जस्सा ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र की सरकार खेती को कॉर्पोरेट सेक्टर के हाथों में सौंपना चाहती है, जो छोटे और माध्यमिक किसानों के लिए बेहद खतरनाक होगा।

प्रदर्शन के दौरान, किसानों ने खनौरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के स्वास्थ्य को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। यह संकेत है कि किसान न केवल अपनी मांगों को लेकर चिंतित हैं, बल्कि वे एकजुट होकर अपनी ताकत भी बढ़ा रहे हैं।

किसान नेताओं ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो वे जल्द ही एक देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए तैयार हैं। उनकी प्राथमिक मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देना शामिल है। इस प्रकार, यह प्रदर्शन एक संकेत है कि किसानों की एकजुटता और साहसपूर्वक विरोध के जरिए वे अपनी बात सरकार तक पहुंचाने में सक्षम हैं।

इस प्रकार, यह आंदोलन एक बार फिर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नया चरण प्रस्तुत करता है। किसान संगठनों का दृढ़ विश्वास है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक स्तर पर विस्तारित करेंगे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसान अब किसी भी प्रकार के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।