अंडा विक्रेता की बेटी ने संभाली पंजाब की कप्तानी, राजकोट में मैच जीतकर चमकाई प्रतिभा!

फाजिल्का के लाल बत्ती चौक के निकट अंडे की रेहड़ी लगाने वाले टेकचंद उर्फ बबली की बेटी प्रियंका ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उसे पंजाब महिला क्रिकेट टीम का कप्तान चुना गया है, जिससे न केवल उसके परिवार का बल्कि पूरे जिले और राज्य का मान बढ़ा है। प्रियंका की सफलता के बाद, उनके पिता बबली को उनकी रेहड़ी पर आने वाले ग्राहकों और स्थानीय लोगों द्वारा बधाइयाँ दी जा रही हैं। उनका कहना है कि प्रियंका ने फाजिल्का और पंजाब का नाम रोशन किया है, विशेष रूप से हाल ही में राजकोट में खेले गए पहले मैच में जीत के साथ।

प्रियंका के क्रिकेट खेलने के प्रति बचपन से ही गहरा शौक रहा है। उनके इस जुनून को पूरा करने में फाजिल्का जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बबली ने बताया कि एसोसिएशन के कोच अर्पित ने प्रियंका को क्रिकेट की बुनियाद सिखाई और उसे एक कुशल खिलाड़ी बनाया। प्रियंका की क्रिकेट यात्रा फरीदकोट में उनकी पढ़ाई के दौरान मोगा क्रिकेट एसोसिएशन से शुरु हुई, और इसके बाद बरनाला क्रिकेट एसोसिएशन के साथ खेलते हुए उसने अपनी क्षमता और Dedication का प्रशस्ति पत्र भी अर्जित किया।

टेकचंद ने यह भी कहा कि प्रियंका उसके लिए बेटे से कम नहीं है। उनकी मेहनत और लगन ने उसे आज इस ऊँचाई तक पहुँचाया है। उन्होंने बताया कि प्रियंका तब केवल 17 वर्ष की थी जब उसने पहली बार क्रिकेट खेलने का निर्णय लिया था। बबली का कहना है कि वह हमेशा अपनी बेटी की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं, और वह उन्हें अपने हर कार्य में प्रोत्साहित करते रहे हैं। आज जब प्रियंका को महिला अंडर-23 इंटरस्टेट टी-20 पंजाब टीम का कप्तान बनाया गया है, तो यह उनके लिए एक बड़ी खुशी का क्षण है।

प्रियंका की इस सफल यात्रा में उनके पिता का समर्थन और प्रेरणा सबसे महत्वपूर्ण रही है। उनकी मेहनत ने उन्हें खेल में स्थापित किया है और अब वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श बन गई हैं। बबली सभी युवा खिलाड़ियों को अपनी मेहनत और लगन के साथ अपने सपनों को पूरा करने का संदेश देते हैं। प्रियंका की कहानी यह दर्शाती है कि यदि किसी के पास लक्ष्य और अभिलाषा हो, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है। इस प्रकार, प्रियंका की क्रिकेट यात्रा ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राज्य को गर्वित किया है।